हॉस्टल में बच्चों को गंदी फिल्में दिखाकर वैसा ही कृत्य करने मजबूर करता था अधीक्षक

अर्जुन झा-
जगदलपुर। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कोई शिक्षक अपने विद्यार्थियों को अश्लील फिल्में देखने और वैसा ही कृत्य करने मजबूर कर सकता है? मगर बस्तर में यह भी संभव है। यहां का एक हॉस्टल अधीक्षक कुछ ऐसी ही विकृत मानसिकता का निकला है, जो हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को न सिर्फ गंदी फिल्में दिखाता रहा है, बल्कि उन बच्चों को वैसा ही कृत्य करने के लिए मजबूर भी करता था। जब पानी सिर के ऊपर से गुजरने लगा तो विद्यार्थियों ने मामले की शिकायत कलेक्टर से कर दी। जांच में बात सही साबित हुई और जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल द्वारा अधीक्षक को सस्पेंड कर दिया गया।
हाल ही में हम सभी ने शिक्षक दिवस मनाया, गुरु की महिमा का खूब गुणगान किया, उनका सम्मान भी किया। मगर इसी बीच एक ऎसी घटना सामने आ गई जिसने समूचे शिक्षा जगत का सिर शर्म से झुका दिया है। ऐसा कृत्य करने वाला व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि एक शिक्षक है। मामला बस्तर विकासखंड के गोंदियापाल के आदिवासी बालक आश्रम का है। इस आश्रम छात्रावास में तैनात प्रभारी अधीक्षक सुकरू राम बघेल का मूल पद सहायक शिक्षक (एलबी) है। 18 सितंबर को बस्तर कलेक्टर हरिस एस अचानक बालक आश्रम गोंदियापाल का निरीक्षण करने पहुंच गए।निरीक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया कि प्रभारी अधीक्षक सुकरू राम बघेल द्वारा आश्रम संचालन में घोर लापरवाही बरती जा रही है। आश्रम में निवासरत छात्रों ने कलेक्टर को जानकारी दी कि अधीक्षक सुकरू राम बघेल के द्वारा उनके साथ मारपीट, गाली गलौच की जाती है एवं अभद्र भाषा का उपयोग किया जाता है। बच्चों ने कलेक्टर को यह भी बताया कि अधीक्षक उन्हें अश्लील विडियों दिखाकर उसका नकल करने हेतु प्रेरित किया जाता है। कलेक्टर हरिस एस ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल सहायक आयुक्त आदिवासी विकास को प्रभारी अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। सहायक आयुक्त ने भी आश्रम पहुंचकर छात्रों के बयान लिए और जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल ने प्रभारी अधीक्षक सुकरू राम बघेल के कृत्य को छग सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के उपनियमों के विपरीत पाते हुए इसे कदाचरण माना। जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रभारी अधीक्षक सुकरू राम बघेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बस्तर निर्धारित किया गया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या इतने घोर अक्षम्य कृत्य की सजा सिर्फ निलंबन है, क्या इससे बड़ी और कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती? अब देखना है कि जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल ऐसे निकृष्ट कार्य करने वाले शिक्षक पर कड़ी कार्रवाई करते भी हैं या नहीं?

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