एक पेड़ माँ के नाम महत्वकांक्षी योजना की खुले आम धज्जियाँ उड़ा रहे वन माफिया
राजदीप शर्मा
छोटे कापसी। पखांजूर तहसील अंतर्गत गांव में वन माफिया खुलेआम हरे-भरे आम एवं सेमर के पेड़ों की अवैध कटाई करते हुए सरकार की महत्वकांक्षी योजना एक पेड़ माँ के नाम’ योजना की धज्जियाँ उड़ा रहे।
एक तरफ सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करवा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना ‘एक पेड़ माँ के नाम’ को केंद्र और राज्य सरकारें जोर-शोर से चला रही हैं,दूसरी तरफ वन विभाग की लापरवाही से अवैध पेड़ कटाई रुकने का नाम नहीं ले रही। वन विभाग के कर्मचारी खुद वन माफिया का साथ दे रहे हैं। जहां अवैध जंगल की लकड़ी कटाई की सूचना मिलती है वह स्थल पर जा कर ग्रामीणों के समक्ष खानापूर्ति कार्यवाही करते हुए पंचनामा बना कर छोड़ दिया जाता है। वहीं दूसरी ओर परलकोट क्षेत्र में वन माफिया इस पहल की सरेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वन विभाग की नाक के नीचे कई वर्षों से वन माफिया का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है, जिससे परलकोट के हरे-भरे जंगल तेजी से कट रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वन माफिया एक आदेश से कई गाड़ी भर जाते है। परलकोट क्षेत्र के विभिन्न जंगलों में वन माफिया का हौसला इतना बुलंद है कि वे खुलेआम हरे-भरे पेड़ों को जंगल से काट रहे हैं। और किसान के पट्टे का बता कर एक ही आदेश से कई गाड़ी भर इन कीमती लकड़ियों को ऊंचे दामों पर अन्य राज्यों में बेचा जा रहा है। जहाँ सरकार ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के महत्वकांक्षी योजना चला कर क्षेत्र को हरा भरा बनाने में लाखों करोड़ों रुपए खर्चा कर रही है। इसके तहत मंत्री से लेकर स्कूली बच्चों और आम नागरिकों तक को पौधारोपण के लिए प्रेरित कर रही है, वहीं वन माफिया इसे ‘एक पेड़ धराशाही’ के रूप में बदल रहे हैं।
वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल, क्षेत्र में चल रहे इस अवैध कारोबार को लेकर वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर संदेह उत्पन्न हो रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि विभाग की निष्क्रियता या कथित मिलीभगत के कारण ही यह अवैध धंधा फलफूल रहा है।
यदि संबंधित विभाग वन माफिया पर ठोस कार्रवाई नहीं करता है, तो क्षेत्र से वन संपदा का जल्द ही सफाया हो जाएगा।
वन विभाग जंगल से भी नहीं काटता फलदार वृक्ष
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार हमारे विभाग के द्वारा जंगल से कूप कटिंग होता है तो जंगल में लगे फलदार वृक्ष को काटा नहीं जाता इसका कारण यह है कि जंगली जानवर पक्षी उसे फल को कहते हैं।
इस संबंध पर पखांजूर हल्का पटवारी योगेश रामटेके से जानकारी के लिए उनके दूरभाष नंबर संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
इस संबंध पर वन परिक्षेत्र अधिकारी कापसी देवदत्त तारम ने बतलाया कि अपने पट्टे की तरह जमीन में लगे पड़े काटने के लिए राजस्व विभाग से अनुमति लेनी होती है। हमें राजस्व विभाग के द्वारा जमीन पर लगे पेड़ की प्रजाति चिन्हांकित कर संख्या को बताने का आदेश मिलता है। अगर वन क्षेत्र से अवैध कटाई करते पाए जाने पर कार्यवाही होगी।
