जेल से आदेश आया और दागी अधिकारी का तबादला रद्द!
–अर्जुन झा-
जगदलपुर।आबकारी घोटाला केस में जेल में बंद पूर्व मंत्री के करीबी 100 करोड़ के भ्रष्टाचार के दागी अधिकारी का तबादला निरस्त हो गया है। चर्चा है कि पूर्व मंत्री ने जेल से संदेश भेजा और तबादला निरस्त कर दिया गया। भ्रष्टाचार के इन 100 करोड़ रुपयों का बड़ा हिस्सा पूर्व मंत्री के पास पहुंचने तथा कुछ करोड़ रुपए कांग्रेस भवन के निर्माण में भी लगने की चर्चा है।
बस्तर संभाग के सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड में हुए सौ करोड़ रुपयों से भी अधिक के इस बड़े भ्रष्टाचार की शिकायत केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव तक की जा चुकी है। ऐसे दागी अधिकारी पर भाजपा सरकार के उद्योग विभाग के मंत्री मेहरबान हैं। सुकमा में पदस्थ उद्योग विभाग के सहायक संचालक एवं पूर्व जनपद सीईओ कोंटा के दामन पर भ्रष्टाचार के दाग लगे हैं। इस अधिकारी का तबादला 19 मई 2025 को बलरामपुर कर दिया गया था। मंत्री ने अपने आदेश को 4 माह बाद संशोधित करते हुए इस दागी अधिकारी को सुकमा में पदस्थ रखने का नया आदेश 30 सितम्बर को जारी किया है। यह सुकमा में चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि जिस दागी अधिकारी ने कांग्रेस भवन निर्माण में भ्रष्टाचार की बड़ी रकम न्यौछावर की थी, उसका तबादला निरस्त किया जाना भाजपा द्वारा भ्रष्टचारियों को संरक्षण दिए जाने की ओर संकेत कर रहा है। ज्ञातव्य हो कि पूर्व मंत्री के करीबी माने जाने वाले सहायक संचालक उद्योग विभाग को हटाने के लिए सुकमा जिले के भाजपा कार्यकर्ताओं ने भाजपा संगठन के प्रदेश स्तर के नेता से निवदेन किया था। इसके बाद प्रदेश संगठन के प्रमुख द्वारा भाजपा कार्यकर्ता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उद्योग मंत्री को पत्र प्रेषित कर सुकमा में पदस्थ सहायक संचालक उद्योग को हटाने का निवेदन किया गया था। संगठन के निवेदन पर उक्त दागी अधिकारी का तबादला बलरामपुर किया गया था। इस अधिकारी पर सुकमा कलेक्टर की मेहरबानी ऐसी रही कि उन्हें चार माह बाद भी भारमुक्त नहीं किया गया। पूर्व आबकारी मंत्री के चहेते अधिकारी पर भाजपा सरकार के मंत्री इस कदर मेहरबान हैं कि तबादला आदेश निरस्त कर उन्हें फिर से सुकमा को लूटने का मौका दे दिया गया है।
ऐसा दंभ किसके दम पर?
सूत्रों के मुताबिक उक्त अधिकारी अपने कार्यालय में अक्सर यह दंभ भरते रहते थे कि सुकमा से मुझे कोई हटा नहीं सकता, भले ही मैं कांग्रेस का करीबी हूं लेकिन भाजपा सरकार में भी मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता और न ही भ्रष्टाचार का कोई जांच करा सकता है। न जाने ऐसा क्या चमत्कार हो गया कि भाजपा सरकार के मंत्री भी दागी अधिकारी पर मेहरबान हो गए हैं। जिस अफसर के खिलाफ करोड़ों के भ्रष्टाचार की शिकायत केन्द्रीय सचिव तक की जा चुकी है, उस अधिकारी को सुकमा में ही यथावत रख जांच को प्रभावित करने के लिए खुली छूट देने जैसा है।सूत्रों से जानकारी मिली है कि सुकमा जिले के भाजपा संगठन के एक नेता को रायपुर जेल से संदेश आया था कि मेरे करीबी अधिकारी का तबादला नहीं होना चाहिए। तबादला होने से पंचायतों में हुए भ्रष्टाचार के कई राज खुल सकते हैं। इसी संदेश के मुताबिक ही काम हुआ और उसका तबादला निरस्त कराने में सफल रहे।
सत्ता और संगठन में टकराव
भाजपा संगठन द्वारा ही उक्त विवादित अधिकारी को हटाने का निवेदन सरकार के नुमाइंदों से किया गया था। संगठन के आदेश को चार माह बाद निरस्त किया जाना इस बात का संकेत है कि सत्ता और संगठन में कुछ ठीक नहीं चल रहा है। खासकर सुकमा के भाजपा संगठन में कई फाड़ हो चुके हैं, जिसका फायदा सीपीआई एवं कांग्रेस के लोग उठा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर दागी अधिकारी का तबादला निरस्त होने से भाजपा का ही एक धडा नाराज हो उठा है। इस तरह देखा जाए तो पूर्व मंत्री ने भाजपा नेता की मदद लेकर एक तीर से कई निशाने साध लिए हैं। पहला तो यह कि उन्होंने अपने परमप्रिय मित्र कुबेर अधिकारी को सुकमा में ही पदस्थ करवा लिया है, दूसरा यह कि इस अधिकारी के सुकमा में रहते तक जांच की आंच पूर्व मंत्री तक नहीं पहुंच पाएगी और सबसे बड़ा निशाना यह किया उन्होंने भाजपा संगठन के भीतर ही बड़ी खलबली मचा दी है।
