यशोदा की कुटिया में उप मुख्यमंत्री शर्मा की भजिया पार्टी

अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर वही दंडकारण्य है, जहां प्रभु श्रीराम ने शबरी के जूठे बेर खाए थे। श्रीरामचंद्र ने अपने वनवास का लंबा काल इसी धरती पर गुजारा था। बस्तर की इसी धरती पर त्रेतायुग का वही नजारा तब देखने को मिला, जब प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने यशोदा की कुटिया में जाकर यशोदा बहन के हाथों से बने आलू भजिये खाए। एक दो नहीं, दर्जन भर से भी ज्यादा भजिये श्री शर्मा खाते चले गए और यशोदा का गुणगान करते रहे। यशोदा तो जैसे धन्य हो गई थी।
यह तब हुआ, जब गृहमंत्री विजय शर्मा नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र के कच्चपाल के दौरे पर थे।सफर के दौरान गृहमंत्री विजय शर्मा को जंगल के बीच स्थित एक टपरीनुमा होटल से अच्छी खुशबू आती महसूस हुई। श्री शर्मा से रहा नहीं गया। उन्होंने तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई और सीधे जा धमके उस होटल में, जहां आदिवासी महिला यशोदा आलू भजिया बना रही थी। विजय शर्मा ने यशोदा बहन से भजिया मांगा। यशोदा ने पेड़ के पत्ते के दोने में उन्हें गरमा गरम भजिये दिए। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा बार बार मांगकर चटनी के साथ भजिये खाते रहे और खाया और भजिया बनाने वाली यशोदा बहन की तारीफ करते रहे। इस दौरान मंत्री विजय शर्मा बार बार यही वाक्य दोहराते रहे- वाह यशोदा बहन क्या जानदार भजिया बनाई हो, आपके हाथ में तो सचमुच जादू है।. जी भरके भजिये खाने के बाद गृहमंत्री विजय शर्मा ने भजिये की कीमत भी यशोदा बहन को अदा की। प्रदेश के बड़े मंत्री विजय शर्मा की इस सादगी पूर्ण कार्यशैली ने बस्तर के लोगो में बीजेपी की सरकार के प्रति सकारात्मक संदेश दिया है। गृहमंत्री को यशोदा बहन के हाथ से बने आलू भजिया अच्छे लगे, उन्होंने जी भरकर भजिये खाए और यशोदा के गुण गाए। एक युग में यशोदा मैया थी जिन्होंने श्रीकृष्ण का पालन किया, अब यशोदा बहन है जिनके हाथ में जादू है। ये वही बस्तर है जो कभी देवता को तो आज एक मंत्री के काफिले को अपनी कुटियानुमा दुकान में रुकने मजबूर कर देता है। यशोदा बहन का सत्कार कभी भुला नहीं पाएंगे मंत्री विजय शर्मा। अपने वनवास के दौरान बस्तर के दंडकारण्य में माता शबरी के जूठे बेर खाए थे। बस्तर के सुकमा जिले में माता शबरी के नाम की एक नदी है और रामाराम में श्रीराम की यादों से जुड़ी कई निशानियां भी मौजूद हैं। यशोदा बहन की कुटिया में त्रेता युग के वही दृश्य जीवंत हो उठे थे।

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