बस्तर की सोंधी महक है फिल्म “माटी” में
जगदलपुर। बस्तर की मिट्टी की कहानी बड़े पर्दे पर दिखने जा रही है। छत्तीसगढ़ी फिल्म “माटी” 14 नवंबर को प्रदेशभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ हो रही है। इस फिल्म के निर्माता संपत झा और निर्देशक अविनाश प्रसाद हैं।
फिल्म की कहानी बस्तर के नक्सलवाद पर आधारित है, लेकिन इसमें केवल हिंसा नहीं, बल्कि उस क्षेत्र के लोगों के संघर्ष, जिजीविषा और उम्मीदों को भी दिखाया गया है। फिल्म “माटी” में मुख्य भूमिका में महेंद्र सिंह ठाकुर हैं, जो एक शिक्षक हैं और उन्होंने कई हल्बी फिल्मों और एलबम में काम किया है। वे फिल्म में भीमा का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म में ज्यादातर स्थानीय कलाकारों ने काम किया है, जिनमें पूर्व नक्सली, शिक्षक, पत्रकार और आम नागरिक शामिल हैं। फिल्म की शूटिंग पूरी तरह से बस्तर के प्राकृतिक परिवेश में की गई है। फिल्म के निर्देशक अविनाश प्रसाद ने बताया कि यह फिल्म बस्तर की आत्मा की अभिव्यक्ति है, जो बस्तर की असली छवि को देश के सामने लाने का प्रयास है। फिल्म में नक्सलियों की प्रेम कहानी भी दिखाई गई है, जिसमें 38 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने किरदार निभाया है। फिल्म के निर्माता संपत झा ने बताया कि यह फिल्म बस्तर की मिट्टी, उसकी खुशबू, दर्द, संघर्ष और उम्मीदों को सिल्वर स्क्रीन पर उतारने जा रही है।
फिल्म में सब कुछ बस्तरिहा
बस्तर की माटी में पैदा हुए कलाकारों ने यह फिल्म बनाई है उन्होंने नक्सलवाद का दंश देखा और समझा है, बस्तर के जंगल देवता, बैगा, गुनिया, झरनों, पर्वतों, जीवनशैली को इस फिल्म के निर्देशक व निर्माता संपत झा बेहतर समझते हैं। वे बताते है कि बस्तर के झरने की कल कल सुरीले संगीत से सजे गीतों की माला इस फिल्म में पिरोई गई है। माटी फिल्म और निर्माता संपत झा की अग्नि परीक्षा 14नवंबर को पब्लिक के सामने होगी।
