मजदूरों के अधिकार ‘मनरेगा’ क़ानून को ख़त्म करने की मोदी सरकार के फ़ैसले के विरोध में कांग्रेस ने किया एकदिवसीय उपवास
बीजापुर :- अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मार्गदर्शन और निर्देशानुसार में जिला कांग्रेस कमेटी ने जिला मुख्यालय बीजापुर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम ‘मनरेगा’ को पुनः लागू करने की मांग को लेकर एक दिवसीय उपवास कर विरोध प्रदर्शन किया गया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा क़ानून के तहत देश भर के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को काम की कानूनी गारंटी प्राप्त थी। देश की किसी भी ग्राम पंचायत में किसी भी परिवार द्वारा काम माँगने पर 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य था जो ग्रामीण मजदूरों का संवैधानिक अधिकार था, जिसे भाजपा और मोदी सरकार ख़त्म करना चाहती है। मनरेगा क़ानून के ख़त्म होने से अब मोदी सरकार ये तय करेगी कि कौन सी ग्राम पंचायतों को काम मिलेगा और किस ग्राम पंचायत को काम नही मिलेगा, और जिस ग्राम पंचायत में काम आयेगा उस ग्राम पंचायत में काम करने के लिए मोदी सरकार अलग ठेकेदारों की भी नियुक्ति करेगी इस तरह ग्राम पंचायतों के संवैधानिक अधिकारों और ग्राम सभाओं का कोई औचित्य ही नहीं रहेगा। मनरेगा बचाओ संग्राम के जिला संयोजक एवं जगदलपुर के पूर्व विधायक रेखचंद जैन ने कहा कि “ मनरेगा कानून को खत्म कर भाजपा और मोदी सरकार ग्राम पंचायतों के अधिकारों को षड्यंत्र पूर्वक ठेकेदारों को सौंपना चाहती है ताकि ग्राम पंचायतों के अस्तित्व को कम किया जा सके।”

इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जिला कांग्रेस कमेटी बिजौर के अध्यक्ष लालू राठौर, बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शंकर कुड़ियम, पीसीसी सदस्य आर. वेणुगोपाल राव, जिला पंचायत सदस्य नीना रावतिया उद्दे, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रमेश यालम, मनोज यालम, शहर कांग्रेस अध्यक्ष पुरुषोत्तम खत्री, मीडिया प्रभारी राजेश जैन, सुनील उद्दे, कांग्रेस नेता प्रवीण डोंगरे, महिला कांग्रेस की गीता कमल, शेख रजिया, संजना चौहान, ममता पांडे, जनपद अध्यक्ष सोनू पोटाम, पूर्व नगर उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम सल्लूर, पूर्व जनपद अध्यक्ष बोधि ताती, संतोष गुप्ता, युवा कांग्रेस के एजाज़ खान, कामेश मोरला, बब्बू राठी, लक्ष्मण कड़ती, मग्गू खत्री और अशोक राठी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए।
