जब जिंदगी ने दिया दूसरा मौका, हथियार से हल तक का सफर- पुनर्वासित युवा
बीजापुर :- – बीजापुर के सुदूर अंचल में जन्मे युवा परिवर्तित नाम महेश ने शायद कभी नहीं सोचा था कि उसकी जिंदगी एक दिन भय और बंदूक की छाया से निकलकर खेतों की हरियाली और आत्मसम्मान की रोशनी तक पहुंचेगी। गरीबी, असुरक्षा और संघर्ष उसके बचपन की सच्चाई थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, काम अनियमित था और भविष्य अनिश्चित।
उसके पिता भी कभी नक्सली संगठन के संपर्क में आए और बाद में उससे जुड़ गए। नक्सली गतिविधियों में संलिप्तता के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा। फरवरी 2022 में रिहाई तक परिवार सामाजिक, मानसिक और आर्थिक संकट से जूझता रहा। इसी पृष्ठभूमि और असुरक्षित माहौल में महेश भी भटक गया और वर्ष 2014 में नक्सली संगठन से जुड़ गया। उसे लगा था कि यह रास्ता उसे पहचान और सुरक्षा देगा, परंतु धीरे-धीरे वह हिंसा, भय और अकेलेपन की गिरफ्त में चला गया।
समय के साथ उसके भीतर सवाल उठने लगे -क्या यही जीवन है? पिता का कारावास, परिवार का दर्द और अनिश्चित भविष्य उसे अंदर ही अंदर झकझोरता रहा। अंततः उसने साहस जुटाया और अप्रैल 2025 में स्वेच्छा से आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास केंद्र, बीजापुर में उसे परामर्श और सहयोग मिला। यहां उसे ट्रैक्टर ऑपरेटर का प्रशिक्षण दिया गया। भारी मशीनों को संचालित करना सीखते हुए उसने केवल तकनीकी कौशल ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मसम्मान भी अर्जित किया। हर दिन का अभ्यास उसके भीतर नई ऊर्जा भरता गया।
आज महेश खेतों में ट्रैक्टर चलाते हुए गर्व महसूस करता है। उसे प्रतिमाह लगभग 10 हजार रुपये की नियमित आय प्राप्त हो रही है। उसके हाथों में अब हथियार नहीं, बल्कि मेहनत और विकास के औजार हैं। ईमानदारी की कमाई ने उसके जीवन में सुकून और स्थिरता लौटा दी है। पिता की रिहाई और बेटे की मुख्यधारा में वापसी ने पूरे परिवार को नई उम्मीद दी है।
महेश की यह कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि सही मार्गदर्शन, पुनर्वास की प्रभावी नीति और एक अवसर किसी भी भटके हुए युवा का भविष्य बदल सकता है। यह केवल एक व्यक्ति का परिवर्तन नहीं, बल्कि उस विश्वास का प्रतीक है कि विकास और विश्वास के रास्ते पर चलकर हिंसा की विरासत को भी बदला जा सकता है।
यह नई शुरुआत उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आज भी सही दिशा की तलाश में हैं कि जिंदगी सचमुच दूसरा मौका देती है, बस उसे अपनाने का साहस चाहिए।
