खूनी खेल के खात्मे के बाद बस्तर में अब नई जंग शुरू



अर्जुन झा-
जगदलपुर नक्सलवाद के खूनी खेल से तेजी के साथ मुक्त होते जा रहे बस्तर में अब नई तस्वीर सामने आ रही है। स्थानीय आदिवासियों ने बाहरी व्यापारियों को साप्ताहिक बाजारों से खदेड़ना शुरू कर दिया है। आदिवासियों का कहना है कि साप्ताहिक बाजारों में स्थानीय व्यापारी और आदिवासी ही व्यापार करेंगे। इस नए आंदोलन या कहें कदम की वजह कुछ बाहरी व्यापारियों की गलत मंशा बताई जा रही है।
आदिवासी समुदाय के लोग पत्रकारों और व्यापरियों की भूमिका से नाराज हैं। उनका कहना है मूल पत्रकार और पत्रकारिता की आड़ में व्यवसाय करने वाले पत्रकारों को अब समाज द्वारा चिन्हित करने की जरूरत है। क्योंकि व्यवसायिक पत्रकारिता की आड़ में बाहरी लोग अखबार लेकर मूल निवासियों की जमीन हथियाने और आदिवासियों के संस्कारों एवं परंपराओं संस्कृति पर हमले कर रहे हैं। पत्रकारिता के दम पर कई व्यापरी क्षेत्र का माहौल बिगाड़ रहे हैं और अशांति फैला रहे हैं। आदिवासी समाज का कहना है कि साप्ताहिक बाजारों में बाहरी व्यापारियों को दुकानें हरगिज नहीं लगाने देंगे। व्यवसायी पत्रकारों की हरकतों से से चिंतित आदिवासी समाज ने अपने इस मिशन की शुरुआत कटेकल्याण साप्ताहिक बाजार से कर दी है। वाहनों से कपड़े, बर्तन, अनाज, किराना सामान, सौंदर्य सामग्री बेचने पहुंचे गीदम, दंतेवाड़ा के व्यापारियों को कटेकल्याण के साप्ताहिक बाजार में दुकानें नहीं लगाने दी गईं। व्यापारियों को खदेड़ दिया गया। कटेकल्याण में लगने वाला साप्ताहिक बाजार में गैर आदिवासी व्यापारियों के प्रवेश पर आदिवासी समाज के पदाधिकारियों द्वारा रोक लगा दी गई है। यह कदम बाहरी व्यापारियों और स्थानीय समुदाय दोनों के लिए ही चिंता का विषय है। क्योंकि बाजार में लोगों को जरूरत के सामान न मिलने पर ब्लॉक एवं जिला मुख्यालयों की ओर रुख करना पड़ेगा। इससे उनका खर्चा तो बढ़ेगा ही, समय की भी बर्बादी होगी। वहीं बाहरी व्यापारियों को भी नुकसान उठाना पड़ेगा। इसलिए बाहरी व्यापारियों को जन भावनाओं का सम्मान करते हुए काम करना चाहिए।

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