कहां गायब हो गया 5 लाख का हाट बाजार?
दल्ली राजहरा। बालोद जिले के वन विभाग में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला आरटीआई के तहत मिले जवाब से सामने आया है। आरटीआई कार्यकर्ता अंकित टाटिया ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक, अरण्य भवन रायपुर को शिकायत कर तत्कालीन रेंजर जीवन लाल सिन्हा समेत अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।



शिकायत के अनुसार वर्ष 2019-20 में जिला पंचायत बालोद के पत्र क्रमांक 227 दिनांक 23-12-2019 से डौंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम कमकापार में हाट बाजार निर्माण के लिए 5 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी हुई थी। निर्माण एजेंसी वन मंडलाधिकारी बालोद को बनाया गया था। हाट बाजार निर्माण के लिए 2020 में कथित रुप से लाखों की सामग्री खरीदी गई, मगर बाजार का निर्माण नहीं हुआ। आरोप है कि तत्कालीन रेंजर डौंडीलोहारा जीवन लाल सिन्हा ने 14 दिसंबर 2020 को अलग-अलग फर्मों से सामग्री क्रय करवाई। इसमें दीपाली इंटरप्राइजेस राजनांदगांव से 6 मिमी लोहा छड़ 300 किलो कीमत 12744, 50 हजार, फ्लाई ऐश ब्रिक्स 1.80 लाख, सुखमन ट्रेडलिंक डोंगरगांव से 1150 किलो लोहा व 250 बैग सीमेंट 101234 रुपए शामिल हैं। यह सभी खरीदी वन मंडलाधिकारी कार्यालय बालोद के पत्रों के आधार पर हुई और भुगतान भी दर्शा दिया गया है।
6 साल बाद भी नही बना बाजार
आरटीआई कार्यकर्ता अंकित टाटिया का आरोप है कि सामग्री खरीदे 6 साल बीत जाने के बाद भी आज दिनांक तक ग्राम कमकापार में हाट बाजार का निर्माण नहीं हुआ है। खरीदी गई लाखों की सामग्री कहां रखी गई, इसका भी कोई हिसाब नहीं है। ग्राम पंचायत कमकापार के सरपंच ने भी लिखित में दिया है कि वर्ष 2015 से 2026 तक वन विभाग द्वारा पंचायत में कोई हाट बाजार नहीं बनाया गया है।
हो पेंशन से वसूली और एफआईआर
शिकायत में मांग की गई है कि मार्च 2026 में सेवानिवृत्त हुए तत्कालीन रेंजर जीवन लाल सिन्हा एवं संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई हो। साथ ही रेंजर की पेंशन राशि से वसूली कर भ्रष्टाचार में लिप्त सभी लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए, ताकि भविष्य में भ्रष्टाचार करने वालों में भय बना रहे। आरटीआई कार्यकर्ता ने कहा कि आरटीआई के जवाब से ही वन विभाग की पोल खुल गई है। मामले में प्रधान मुख्य वन संरक्षक से जांच कर कार्रवाई की मांग की गई है।
