कौशल विकास के तहत मेशन का प्रशिक्षण लेकर बना डाला अपना पीएम आवास!
–अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर संभाग के सुकम जिले के कोंटा विकासखंड की ग्राम पंचायत सिलगेर से एक ऎसी कहानी सामने आई है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और हर गरीब को पक्के आशियाने के संकल्प को पूरा करती है। यहां एक गरीब मजदूर ने कौशल विकास के तहत राजमिस्त्री यानि मेशन का प्रशिक्षण लेकर न सिर्फ आत्मनिर्भरता का संबल हासिल किया, बल्कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत अपना पक्का मकान खुद अपने हाथों के हुनर के दम पर खड़ा कर लिया।

सिलगेर निवासी हितग्राही माड़वी कोसा का वर्षों पुराना सपना अब साकार हो गया है। जो परिवार कभी कठिन परिस्थितियों में जर्जर झोपड़ी में जीवन गुजार रहा था, आज उसी परिवार के पास एक सुरक्षित, सम्मानजनक और मजबूत पक्का आवास है। नियद नेल्लानार योजना एवं प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के संयुक्त प्रयासों ने उनके जीवन में वह बदलाव ला दिया, जिसने संघर्ष को उम्मीद में बदल दिया। इस बदलाव की असली नींव बनी रूरल मेसन ट्रेनिंग, जिसे मेरा पथ एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित किया गया। प्रशिक्षण प्राप्त कर माड़वी कोसा ने न केवल निर्माण कार्य की तकनीक सीखी, बल्कि आत्मविश्वास के साथ अपने ही हाथों से अपने घर का निर्माण कर दिखाया। यह कहानी केवल एक मकान बनने की नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के आत्मनिर्भर बनने और अपने भविष्य को स्वयं गढ़ने की प्रेरक मिसाल बन गई है। वित्तीय वर्ष 2024–25 में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत माड़वी कोसा को 1.20 लाख रुपए की आवास स्वीकृति मिली। इसके साथ ही मनरेगा अभिसरण से 95 मानव दिवस एवं 23 हजार 85 रुपए की मजदूरी सहायता प्रदान की गई, जिससे निर्माण कार्य को गति मिली। वहीं स्वच्छ भारत मिशन से 12 हजार रुपए की राशि से शौचालय निर्माण, सोलर पैनल से रोशनी की सुविधा और नल–जल व्यवस्था से घर तक स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से उनके परिवार का जीवन अब सुविधाजनक और सुरक्षित बन गया है। इस प्रेरणादायक परिवर्तन पर सुकमा कलेक्टर अमित कुमार ने इसे जिले के लिए मॉडल बताते हुए कहा कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन और कौशल विकास मिलकर परिवारों को आत्मनिर्भर बना सकते हैं। वहीं जिला पंचायत सीईओ मुकुंद ठाकुर ने इसे सफल उदाहरण बताते हुए कहा कि प्रशिक्षण से गुणवत्ता बढ़ती है और हितग्राही स्वयं सशक्त बनता है। अपने प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने माड़वी कोसा से संवाद कर उन्हें शॉल, श्रीफल एवं सांकेतिक चाबी भेंट कर सम्मानित किया। आज माड़वी कोसा का यह पक्का घर केवल ईंट-पत्थर का निर्माण नहीं, बल्कि संघर्ष से सफलता तक की वह कहानी है जो पूरे क्षेत्र को प्रेरणा दे रही है।
