बस्तर को फिर से सुलगाने की “जिद”, टाकरागुड़ा में धर्मांतरित व्यक्ति के शव दफनाने पर विवाद
–अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर में मतांतरित व्यक्तियों के शवों को दफनाने को लेकर विवादों का सिलसिला लगातार जारी है। खुद का कब्रिस्तान रहते हुए भी गांव के सार्वजनिक श्मशान में शव दफनाने की जिद इस बार भी विवाद की वजह बनी है। इस जिद को बस्तर में सामाजिक सदभाव बिगाड़ने की साजिश का हिस्सा और “जिद” माना जा रहा है।
ताजा मामला जिला मुख्यालय जगदलपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग पर स्थित बड़ाजी थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत टाकरागुड़ा के झिटकापारा का है। इस गांव के एक ईसाई मतांतरित व्यक्ति की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। स्थिति तनावपूर्ण होने पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे। झिटकापारा निवासी माड़िया जनजाति के पंडरी नाग की मृत्यु के बाद उसके शव दफनाने को लेकर हंगामा हुआ। ग्रामीणों के अनुसार पंडरी नाग ने कई वर्ष पूर्व धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म अपना लिया था और तभी से वह उस धर्म का पालन करते आ रह था। पंडरी नाग की मृत्यु के बाद ईसाई समुदाय के कुछ लोगों ने उनका शव गांव के पारंपरिक हिंदू मरघट में दफनाने की मांग रखी। जैसे ही इसकी सूचना गांव में फैली, बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट होकर मरघट स्थल पर पहुंच गए और विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि शव को जगदलपुर के करकापाल स्थित ईसाई कब्रिस्तान में ही दफनाया जाए, जो इस प्रयोजन के लिए चिन्हित है।
पुजारी ने बताई परंपरा
मौके पर मौजूद ग्राम पुजारी ने कहा कि हमारा गांव आदिकाल से सत्य सनातन धर्म और प्रकृति पूजा को मानने वाला है। हमारे पूर्वज पीढ़ियों से देवी देवताओं और धरती की पूजा करते आ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों से कुछ लोग अपनी मूल संस्कृति और रूढ़ी परंपरा को छोड़कर विदेशी पाश्चात्य संस्कृति अपना रहे हैं। ये लोग गांव के गुड़ी जतरा जैसे पारंपरिक पूजा आयोजनों में शामिल नहीं होते, बल्कि उनका विरोध करते हैं। इससे गांव में आपसी टकराव की स्थिति बनती है। वहीं ग्राम पंचायत के सरपंच बंगाराम बघेल ने कहा कि गांव में इस तरह के मामलों के लिए ग्रामसभा में नियम पारित हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट का भी स्पष्ट आदेश है कि प्रत्येक धर्म के अनुयायियों के अंतिम संस्कार के लिए सरकार द्वारा अलग स्थान आवंटित किए गए हैं। हम उसी आदेश का पालन कर रहे हैं। ईसाई समुदाय के लिए करकापाल में कब्रिस्तान आवंटित है, इसलिए शव वहीं दफनाया जाना चाहिए।
विहिप-बजरंग दल का विरोध
घटना की सूचना पर विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल के विभाग संयोजक सिकंदर कश्यप मौके पर पहुंचे। उन्होंने मिशनरियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि हम ईसाई मिशनरियों के मंसूबों को किसी भी हाल में सफल नहीं होने देंगे। ये लोग शिक्षा और चिकित्सा के नाम पर हमारे भोले भाले आदिवासी भाई बहनों को बरगलाते हैं और उनका धर्मांतरण करा लेते हैं। इसके बाद उनकी ही जमीन पर चर्च बनाते हैं। उनके पट्टे पर लोन निकलवाकर उन्हें कर्ज में फंसा देते हैं। यह अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिस भाषा में समझेंगे, बजरंग दल उसी भाषा में समझाएगा। वहीं विश्व हिंदू परिषद के जिला सह मंत्री घनश्याम नाग ने कहा कि बस्तर जैसा शांतिप्रिय क्षेत्र अब आए दिन विवादों में घिर रहा है। आदिवासी बेटियों को लव जिहाद में फंसाने, लैंड जिहाद करने, गांव गांव में अवैध चर्च बनाकर सामाजिक रीति नीति को तोड़ने का काम हो रहा है। मानव तस्करी भी बड़ी चालाकी से की जाती है। कुछ माह पहले नारायणपुर से दिल्ली ले जाई जा रही बच्चियों को हमारे संगठन के कार्यकर्ताओं ने रेलवे स्टेशन पर पकड़कर पुलिस के हवाले किया था। जिला सह संयोजक योगेश रैली ने ग्रामीणों से अपील की कि सभी एकजुट रहें और सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी बाहरी व्यक्ति गांव में आता है तो उसकी सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में दें। इससे किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सकेगा। इस दौरान सरपंच बंगाराम बघेल, कमला बघेल, मिकेश्वर, जनपद सदस्य हिड़मा राम मंडावी, बदरू राम, रैयतू राम, लच्छिन राम, अनिल बघेल, सुंदर लाल समेत सैकड़ों की संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।
नई नहीं है यह “जिद”
बस्तर संभाग में मतांतरित हो चुके लोगों के शवों को हिंदुओं के मुक्तिधामों में दफनाने की जिद का यह मामला नया नहीं है। इससे पहले भी संभाग के पचासों गांवों में एक समुदाय विशेष की “जिद” के मामले आते रहे हैं। तीन दिन पहले ही बस्तर जिले के भानपुरी थाना क्षेत्र के ग्राम करंदोला में इसी तरह की घटना हुई थी। यहां धर्म परिवर्तन कर चुकी सेवानिवृत शिक्षिका रुक्मणि कुर्रे के शव को वन विभाग की भूमि पर दफनाने की कोशिश की जा रही थी। आरोप है कि वन विभाग की तार फेंसिंग और बाड़ को तोड़ कर करीब 5 डिसमिल जमीन को कब्रगाह में तब्दील करने की कोशिश की जा रही थी। बता दें कि करकापाल में मसीही कब्रिस्तान रहते हुए भी सरकारी जमीन और हिंदुओं के श्मशान घाटों में मतांतरित लोगों के शवों को दफनाने की ऎसी जिद से जाहिर होता है कि बस्तर को फिर से सुलगाने की साजिश रची जा रही है।
