गोठान में फेंक दिया बेशकीमती हरा सोना!



-अर्जुन झा-
जगदलपुर। वन कर्मियों द्वारा हरे सोने को गांव के गोठान में फेंके जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। वन मंत्री केदार कश्यप के निर्वाचन एवं गृह क्षेत्र में वन विभाग ने इस कृत्य को अंजाम दिया है। इस घटनाक्रम से बड़े भ्रष्टाचार की बू आ रही है।
वनोपज तेंदूपत्ता को हरा सोना कहा जाता है। तेंदूपत्ता बस्तर ही नहीं बल्कि वनों की बहुलता वाले सभी राज्यों की प्रमुख वनोपज है, जो खास सीजन में निकलता है। तेंदूपत्ता मुख्यतः बीड़ी बनाने में उपयोग होता है। यह न केवल आदिवासी परिवारों की आजीविका का बड़ा साधन है, बल्कि सरकारों की आय का बड़ा जरिया भी है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए उच्च दर पर तेंदूपत्ता खरीदी, बोनस, चरण पादुका वितरण जैसी व्यवस्थाएं कर रखी हैं। इस कार्य से लाखों परिवारों का गुजारा चलता है। तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए शासन प्रशासन व्यापक व्यवस्थाएं करना पड़ती हैं, इस कार्य में करोड़ों रुपए खर्च करने पड़ते हैं। मगर अब वन विभाग के कर्मियों ने ही इस हरे सोने को फेंकना शुरू कर दिया है। वन विभाग के भानपुरी रेंज के अंतर्गत आने वाली पंचायत तारागांव गोठान में वन कर्मियों ने पचासों बोरा तेंदूपत्ता को यूं ही फेंक दिया है। जानकारी के अनुसार भानपुरी उप वन मंडल के अंतर्गत बने गोदाम से निकाल कर इसे ट्रैक्टर के माध्यम से लाकर इसे यहां फेंका गया है। अब इतने मंहगे वनोपज तेंदूपत्ता को इस तरह सड़कों पर फेका जाना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इन बोरों पर लगाई गई पर्ची पर समिति का नाम बनियागांव और संग्रहण केंद्र का नाम अमलीगुड़ा अंकित है। पर्ची पर अंकित तिथि के अनुसार यह तेदूपत्ता सन 2025 के सीजन का है। ऐसे में सवाल उठता है कि पिछले सीजन के इस तेंदूपत्ते को आखिर अब तक क्यों दबा कर रखा गया था। इस पूरे मामले में बड़े भ्रष्टाचार की गंध आ रही है। अब देखना होगा कि वन मंत्री केदार कश्यप के निर्वाचन एवं गृह क्षेत्र में इस घपलेबाजी पर क्या कार्रवाई होती है?

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