कंडम हो गया है खैरगुड़ा का आंगनबाड़ी भवन
जगदलपुर। बस्तर जिले की ग्राम पंचायत कुंडगुड़ा के खैरगुड़ा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र भवन की बदहाल स्थिति बच्चों और कार्यकर्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन गई है। भवन के जर्जर होने के साथ ही परिसर में बाउंड्री वॉल और शौचालय में पानी की व्यवस्था न होने से केंद्र का संचालन प्रभावित हो रहा है।
आंगनबाड़ी भवन कई वर्षों से जर्जर स्थिति में है। दीवारों पर दरारें आ चुकी हैं। स्थिति को गंभीर देखते हुए महिला बाल विकास बस्तर परियोजना अधिकारी सावित्री बघेल ने बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर इस भवन में बच्चों को बैठाने पर रोक लगा दी है। उन्होंने केंद्र को तत्काल किराए के भवन में शिफ्ट करने के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने बताया कि विभाग को इस संबंध में अवगत कराया गया है। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि बाउंड्री वॉल नहीं होने के कारण रात में असामाजिक तत्व परिसर में प्रवेश कर जाते हैं और शौचालय को गंदा कर देते हैं। सुबह केंद्र खुलने पर कार्यकर्ताओं को पहले सफाई करनी पड़ती है। शौचालय में ताला नहीं है और पानी भी उपलब्ध नहीं है। इससे 3 से 6 वर्ष के बच्चों और स्टाफ दोनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पीने के पानी के लिए बोरिंग और बाल्टी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इस मुद्दे को लेकर हाल ही में खैरगुड़ा पहुंचे बस्तर सांसद महेश कश्यप के समक्ष आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने केंद्र की स्थिति रखी और नए भवन की स्वीकृति की मांग की थी। मधोता सेक्टर पर्यवेक्षक भारती बघेल ने बताया कि केंद्र की स्थिति की जानकारी उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। नए भवन के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा चुका है। सुशासन तिहार के दौरान भी इस संबंध में आवेदन दिया गया था। ग्राम पंचायत कुंडगुड़ा के सरपंच ईस्पर मंडावी ने कहा कि भवन की स्थिति से प्रशासन को अवगत करा दिया गया है। उन्होंने कहा कि गांव में नल-जल योजना शुरू होने के बाद आंगनबाड़ी के शौचालय में पानी की व्यवस्था कर दी जाएगी।ग्रामीणों और अभिभावकों ने मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए खैरगुड़ा आंगनबाड़ी केंद्र के लिए जल्द नए भवन की स्वीकृति दी जाए। साथ ही परिसर में बाउंड्री वॉल का निर्माण और शौचालय में नियमित पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।आईसीडीएस नियमों के अनुसार प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में सुरक्षित भवन, पेयजल और शौचालय की सुविधा होना अनिवार्य है। बस्तर जैसे आदिवासी क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्र स्वास्थ्य और शिक्षा की पहली कड़ी माने जाते हैं। ऐसे में खैरगुड़ा केंद्र की स्थिति चिंता का विषय है।
