समारू महोबिया सेनानी ने अंग्रेजों के खिलाफ बंबई अधिवेशन से प्राप्त बुलेटिन की कापी करने साइक्लोस्टाइल मशीन छुईखदान से लेकर रायपुर गये थे

कवर्धा,,,सितंबर माह के प्रथम रविवार को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था कबीरधाम जिला द्वारा स्थानीय भारतमाता चौक कवर्धा में जितेंद्र रघुवंशी राष्ट्रीय महासचिव कनखल हरिद्वार के निर्देशन में श्रद्धांजलि कार्यक्रम रखा गया था। सर्व प्रथम भारतमाता मूर्ति के साथ स्व समारूराम महोबिया के तेलचित्र पर गुलाल का टीका लगाकर पुष्प अर्पित करते हुए दीप प्रज्वलित किया गया। आरती की गई भारतमाता की जय, महात्मा गांधी की जय, वंदे मातरम्, सुभाषचंद्र बोस , समारूराम महोबिया की जय के नारों से वातावरण गूंज उठा। उक्त जानकारी देते हुए डा नरेश कुमार यदु अध्यक्ष स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था कबीरधाम जिला ने बताया कि यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम निरंतर किया जा रहा है यह जिले का दसवां कार्यक्रम है शुरुवात दिसंबर 25 से हुआ है । इसकी प्रेरणा बिलासपुर में हुए सेनानी उत्तराधिकारी राज्य स्तरीय सम्मेलन से मिला था। आज के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में संस्था के कोषाध्यक्ष श्री महेश महोबिया ने अपने पिताश्री स्व समारूराम महोबिया स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि स्व समारूराम महोबिया का जन्म 7 नवंबर 1909 छुईखदान में हुआ था । अंग्रेजों के खिलाफ सक्रियता निभाने में तत्कालीन प्रसिद्ध सेनानी ठाकुर प्यारेलाल का सानिध्य होना बताया। 8 अगस्त 1942 को बम्बई कांग्रेस अधिवेशन में महात्मा गांधी द्वारा किए गए आव्हान “करो या मरो” पर सभी सदस्यों को जारी किए गए विस्तृत जानकारी के साथ बुलेटिन की प्रतियां वितरित की गई थीं , जिसको लेकर छुईखदान कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष गोवर्धन वर्मा बम्बई से रायपुर आए और अंग्रेजों से छिपकर ठाकुर प्यारेलाल के घर रुके थे ,किसी के माध्यम से समारूराम महोबिया को छुईखदान से साइक्लोस्टाइल मशीन लाने को कहा। तब समारूराम महोबिया साइक्लोस्टाइल मशीन लेकर रायपुर पहुंचकर बंबई कांग्रेस अधिवेशन की बुलेटिन का साइक्लोस्टाइल कर सैकड़ों प्रति लेकर वापस छुईखदान आकर आम पब्लिक स्कूल भवन आदि में बुलेटिन की प्रति को चिपका रहे थे, इसी दरमियान अंग्रेजों ने समारूराम महोबिया को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया उन्हें कोर्ट द्वारा 3 साल की सजा 11 अक्टूबर 1942 को भारतीय दंड की विधान धारा 17( 2) और 38 (5) डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स के तहत सुनाई थी। इनके साथ अमृतलाल महोबिया, पूनमचंद सांकला को भी 3 साल की सजा सुनाई थी।
स्वतंत्रता दिवस की रजत जयंती पर 1973 में ताम्रपत्र भेंट कर राज्य शासन द्वारा सम्मानित किया गया था। समारूराम महोबिया ने अंग्रेजों के खिलाफ जंगल सत्याग्रह आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था जिसके कारण 6 महीना जेल में रहे। डा नरेश कुमार यदु अध्यक्ष ने बताया कि देश को आजाद हुए 79 साल हो गया है। देश की आजादी में शामिल उन हजारों लोगों ने कुर्बानी दिया है जिसके कारण भारत देश अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्र गान के साथ समाप्त हुआ। समिति ने निर्णय लिया है कि अगले माह का श्रद्धांजलि कार्यक्रम कबीरधाम जिले के ग्राम झिरोनी में प्रस्तावित है। आज के कार्यक्रम में डा नरेश कुमार यदु अध्यक्ष, इंजी एस एस जैन उपाध्यक्ष, नरोत्तम महोबिया सचिव, महेश महोबिया कोषाध्यक्ष, सियाराम महोबिया सह सचिव,गुरुप्रसाद शर्मा आदि शामिल थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *