सामुदायिक मध्यस्थ नियुक्त हुए समाजसेवी चंद्रकांत यादव, न्याय सुलभ बनाने में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका

कवर्धा,,
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कबीरधाम द्वारा मध्यस्थता अधिनियम, 2023 के तहत सामुदायिक मध्यस्थता केन्द्र के लिए महत्वपूर्ण नियुक्तियां की गई हैं। इस संबंध में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कबीरधाम श्रीमती संघरत्ना भतपहरी द्वारा आदेश क्रमांक 08/DLSA/2026 जारी किया गया है।

जारी आदेश के अनुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं न्यायाधीश अमन तिग्गा को सामुदायिक मध्यस्थता केन्द्र का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं सामुदायिक मध्यस्थ के रूप में जिले के प्रतिष्ठित समाजसेवी चंद्रकांत यादव, वरिष्ठ नागरिक मोहन लाल गर्ग एवं श्रीमती सविता साहू की नियुक्ति की गई है।

सामुदायिक मध्यस्थ के रूप में नियुक्त चंद्रकांत यादव लंबे समय से सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। वर्ष 2006 से निरंतर समाज सेवा के कार्यों में संलग्न श्री यादव ने विधि, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, जन जागरूकता, सामाजिक समरसता तथा जनहित के अनेक कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों को देखते हुए उन्हें अब तक 2 राष्ट्रीय एवं 1 राज्य स्तरीय सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी इस नियुक्ति पर जिले के सामाजिक एवं प्रबुद्ध वर्ग में हर्ष का वातावरण है तथा अनेक संगठनों एवं नागरिकों ने उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

मध्यस्थता अधिनियम, 2023 के अंतर्गत स्थापित सामुदायिक मध्यस्थता केन्द्र का मुख्य उद्देश्य समाज में उत्पन्न होने वाले विवादों का आपसी संवाद, समझौते और सहमति के माध्यम से समाधान करना है। इस व्यवस्था से ऐसे विवाद जिनका समाधान आपसी सहमति से संभव है, उन्हें न्यायालयों में लंबित मुकदमों में परिवर्तित होने से पूर्व ही सुलझाया जा सकेगा।

विशेष रूप से राजीनामा योग्य अपराध, घरेलू एवं पारिवारिक विवाद, पड़ोसी संबंधी विवाद, आपसी भूमि एवं संपत्ति विवाद, सामाजिक एवं सामुदायिक स्तर के मतभेद जैसे मामलों का निराकरण सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से किया जाएगा। इससे संबंधित पक्षों का समय, धन एवं ऊर्जा की बचत होगी तथा न्यायालयों पर बढ़ते मामलों के भार को कम करने में भी सहायता मिलेगी।

सर्वोच्च न्यायालय एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा वैकल्पिक विवाद निवारण प्रणाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सामुदायिक मध्यस्थता व्यवस्था को विशेष महत्व दिया जा रहा है। यह व्यवस्था न्याय तक आम नागरिकों की पहुंच को सरल एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सामुदायिक मध्यस्थों की नियुक्ति से जिले में विवादों के शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण समाधान को नई दिशा मिलेगी। आपसी संवाद और सहमति के आधार पर विवादों के निराकरण से सामाजिक सद्भाव, भाईचारा एवं न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत होगा।

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