बीएसपी की लीज वाली जमीन की हेराफेरी, आरटीआई के तहत दी आधी अधूरी जानकारी
-अर्जुन झा-
दल्ली राजहरा। नगर पालिका दल्ली राजहरा के एक बुद्धिमान कर्मचारी के छल प्रपंच से बीएसपी की लीज की जमीन एक व्यापारी समूह हवाले कर दी गई है। इस व्यापारी के नाम से नगर पालिका परिषद में पिछले दस से पंद्रह साल का संपति कर की वसूली भी होती आई है। वहीं बीएसपी प्रबंधन भी शासन से लीज पर मिली जमीन को लेकर खामोश बैठा हुआ है। वहीं जमीन को लेकर व्यापारी संघ के मानद सदस्य प्रवीण जैन ने जब सूचना के अधिकार के तहत नगर पालिका से जानकारी मांगी तो, उन्हें वांछित बिंदुओं पर पूरी जानकारी न देकर गोलमोल जवाब दिया गया। इससे जाहिर होता है कि नगर पालिका प्रशासन अपनी और अपने तथाकथित बुद्धिमान कर्मचारी के काले कारनामे को छुपाने का प्रयास कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि दल्ली राजहरा में आशा टॉकीज के पास स्थित जमीन बीएसपी की राजहरा माइंस को शासन द्वारा लीज पर दी गई है। खाली पड़ी इस जमीन का उपयोग आसपास के व्यापारी वाहन पार्किंग स्थल के रूप में और आम नागरिक तथा विद्यार्थी आम रास्ते के रूप में उपयोग करते आ रहे थे। नगर पालिका के राजस्व विभाग में पदस्थ लैंड माफिया के रूप में काम करते आ रहे एक कर्मचारी ने अपने पद का दुरूपयोग करते हुए इस जमीन को एक प्रभावशाली व्यापारी के हवाले कर दिया है। इस कर्मचारी ने बीएसपी की संपति को व्यापारी के नाम पर करने का बड़ा दुस्साहस कर दिखाया है। यह कर्मचारी उक्त व्यापारी से उक्त जमीन का संपत्ति कर वसूल कर बाकायदा उसके नाम से संपत्ति कर की रसीदें भी जारी करता आया है। आरटीआई के तहत जमीन से जुड़ी जानकारी मांगने पर वांछित मुख्य बिंदु को दरकिनार कर गुमराह करने वाली जानकारी दे दी गई है। व्यापारी संघ के मानद सदस्य प्रवीण जैन ने जमीन से संबंधित जानकारी सूचना के अधिकार के तहत आवेदन देकर नगर पालिका से मांगी थी, किंतु बुद्धिमान राजस्व प्रभारी ने अपने को बचाने हेतु गलत जानकारियां आवेदक प्रवीण जैन को दी है। इससे स्पष्ट होता है कि उक्त भ्रष्ट कर्मचारी व्यापारी को गलत ढंग से जानकारी देकर अपने कारनामे को छुपाने प्रयासरत है। प्रवीण जैन ने 13 अगस्त को 5 बिंदुओं पर नगर पालिका से जानकारी मांगी थी। श्री जैन ने पूछा था कि वार्ड 21, आशा टॉकीज़ वाली संपत्ति का संपत्ति कर अभी किसके नाम से लिया जा रहा है? उसकी प्रमाणित प्रति दें। इस सिर्फ संपत्ति कर रजिस्टर की फोटो कॉपी दी गई। उसमें क्रमांक 433 पर आशा टॉकीज अजय कुमार दिलीप कुमार जैसा नाम दिख रहा है, लेकिन ये स्पष्ट प्रमाणित प्रति नहीं है कि वर्तमान में नाम किस आधार पर दर्ज है। श्री जैन ने बिंदु क्रमांक 2 में पूछा था कि क्या नामांतरण 2012 के विक्रय पत्र के आधार पर हुआ? उसका प्रमाणित विक्रय पत्र और आवेदन दें। जवाब कुछ नहीं दिया। सिर्फ रसीद बुक का एक पन्ना दिया गया है। विक्रय पत्र 2012 की कोई कॉपी नहीं दी गई। तीसरे बिंदु में प्रवीण जैन ने पूछा था कि यह बीएसपी की लीज भूमि है, तो नाम बदलने से पहले बीएसपी से अनापत्ति पत्र और अनुमति ली क्या? उसकी प्रति दें। नहीं ली तो किस नियम से बिना बीएसपी की सहमति के किया? इस बिंदु का कोई जवाब ही नहीं दिया गया। श्री जैन ने चौथी जानकारी चाही थी कि क्या 2002 में लीज खत्म हो चुकी बीएसपी भूमि का नाम परिवर्तन नगर पालिका कर सकती है? उससे संबंधित नियम / दिशा-निर्देश की जानकारी क्या है। जवाब में किसी नियम या निर्देश की जानकारी नहीं दी गई।
पांचवी बिंदु में बिना समुचित जांच के नामांतरण करने वाले अधिकारी का नाम और पदनाम बताने की जानकारी चाही गई थी, इसका जवाब निरंक रहा। नगर पालिका ने सिर्फ 4 पेज का बही-खाता देकर 5 में से 4 सवालों को टाल दिया है। यह सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 7(1) का खुला उल्लंघन है। कुल मिलाकर इसका सीधा सा अर्थ है कि पालिका में बड़े स्तर पर जो गोलमाल हुआ है उसको छुपाने में कर्मचारी अधिकारी सारे एक दूसरे के कर्मकांड की लीपापोती करने में लगे हुए हैं क्योंकि एक फंसेगा तो सब फसेंगे। अब देखने वाली बात यह है कि नगर पालिका के कथित बुद्धिमान कर्मचारी और जिम्मेदार अधिकारी द्वारा की गई करोड़ों की इस बेशकीमती जमीन की हेराफेरी में राज्य शासन, जिला प्रशासन और बीएसपी प्रबंधन क्या कदम उठाते हैं। अगर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई हुई तो नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी एवं बुद्धिमान कर्मचारी का जेल जाना तय है।
