खत्म हुई नक्सलवादियों की बंदिशें, बस्तर दशहरा में धुर नक्सलग्रस्त रहे इलाकों से भी आए देवी देवता



-अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे और सुशासन की झलक अब आस्था में भी दिखाई देने लगी है। पहली बार बस्तर दशहरा में बस्तर संभाग के धुर नक्सल प्रभावित रहे इलाकों के अलावा पड़ोसी राज्य आंध्रप्रदेश, उड़ीसा और तेलंगाना से भी देवी देवताओं का बड़ी संख्या में आगमन हुआ है। यहां अब तक लगभग एक हजार देवी देवताओं का आगमन हो चुका है। देवी देवताओं के साथ आए सिरहाओं, पुजारियों, बैगाओं और सेवकों के लिए जिला प्रशासन एवं बस्तर दशहरा समिति द्वारा अच्छी व्यवस्थाएं की गईं है, फिर भी कुछ छिटपुट शिकायतें बनी हुई हैं।


बस्तर के नक्सलमुक्त होने के बाद बस्तर दशहरा का यह पहला आयोजन है। बस्तर दशहरा का रोमांच दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। इस बार के बस्तर दशहरे में नक्सल दंश से मुक्ति, नक्सलियों द्वारा पूजा आराधना में लगाई जाने वाली पाबंदी के धराशायी हो जाने और परवान चढ़ती आस्था में सुशासन की भी झलक साफ दिखाई देती है। पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि अति नक्सल प्रभावित रहे बस्तर के नारायणपुर जिले के सुदूर और दुर्गम अंचलों से लेकर सुकमा जिले के बीहड़ जंगलों में बसे गांवों से भी देवी देवताओं का जगदलपुर आगमन हुआ है। वहीं कोंडागांव, कांकेर, दंतेवाड़ा, बस्तर, बीजापुर जिलों के भी दुर्गम गांवों से देवी देवता आ चुके हैं और उनके पधारने का सिलसिला लगातार जारी है। बड़ी बात तो यह है कि नक्सल प्रभावित रहे पड़ोसी राज्य आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और उड़ीसा के वनांचलों तथा मैदानी इलाकों से भी देवी देवता और आस्था के प्रतीकों का आगमन बस्तर दशहरे में हुआ है। बस्तर की आराध्य देवी माई दंतेश्वरी का आगमन दंतेवाड़ा से हो चुका है। इन देवी देवताओं के साथ बड़ी संख्या में सिरहा, पुजारी, बैगा और सेवक भी यहां आए हैं।. इन सभी के रहने, खाने पीने, मांस मदिरा, पूजन सामग्री तक का पर्याप्त इंतजाम यहां किया जा रहा। तहसीलदार कार्यालय में निर्मित दशहरा परिसर में इन्हे है ठहराया गया है। इस बार अबतक करीब एक हजार के देवी देवता जगदलपुर आ चुके हैं।



लगती है रोज हाजिरी
सभी पुजारियों, सिरहाओं की प्रशासन के नुमाइंदे हाजिरी लेते हैं, फिर उन्हें उन्हें राशन और अन्य जरूरत की वस्तुएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यहां बंगाराम बाबा, जलनीगुड़ी माता, दुलार दाई माता, कंडाकमकोली माता, दुर्गा माता, दंतेश्वरी माता, मनुमान माता, ग्राम परगना नूतन पाल, बरंगा देव छिदवाड़ा रामपाल मोला से आ चुके हैं। बरंगा देव के साथ में आए पुजारी चैतराम मौर्य की शिकायत है कि पूजन सामग्री काफी विलंब से मिलती है। वहीं बयानार छोटेडोंगर कोंडागाव से बूढ़ी देवका आगमन हुआ है। साथ में पुजारी मानाजी आए हैं, बोमड़ा से पुजारी श्रीराम देवी देवता लेकर आए हैं। सभी यहां की व्यवस्थाओं से संतुष्ट हैं। नक्सल मुक्ति का साफ असर इस बार के बस्तर दशहरा में देखने को मिल रहा है। पहले नक्सली सुदूर गांवों में फरमान जारी कर बस्तर दशहरा में देवी देवता न ले जाने की चेतावनी देते थे। डर के आगे आस्था दब जाती थी। अब न नक्सली रह गए हैं और न उनकी धमकी का कोई असर रह गया है। लोग बेखौफ होकर देवी देवता लेकर बस्तर दशहरा में पहुंच रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *