अब दिमागी नक्सलियों को परास्त करने की बारी: नरेंद्र मोदी
जगदलपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 8 नवंबर को बस्तर के करनपुर कैंप में सीआरपीएफ के जवानों के साथ दिवाली मनाई।इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नक्सलवाद तो खत्म हो गया है, पर खतरा अभी टला नहीं। अब दिमागी नक्सलियों को परास्त कर देश को सुरक्षित करना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज विशेष विमान से दोपहर को जगदलपुर दंतेश्वरी एयरपोर्ट पर पहुंचे जहां से वे हेलीकॉप्टर के जरिए करनपुर सीआरपीएफ कैंप पहुंचे और जवानों के साथ दीवाली मनाई। पीएम का यह प्रवास काफी गोपनीय था। श्री मोदी ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि हर जवान मेरा परिवार है। श्री मोदी ने कहा कि नक्सलवाद और आंतक का कहर खत्म हो चुका है। अब विकास की बयार शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि 2026 की यह दीपावली हमारे लिए विशेष है। 40-50 वर्ष बाद यह पहली दीवाली है जो दशको की लड़ाई जीत कर मनाई जा रही है। यह हमारे लिए यादगार रहेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर के इन जंगलों में नक्सली बच्चो को टीका तक लगाने नहीं दिया करते, न ही मोबाईल टॉवर लगने देते थे। लाखों गरीब परिवार अवसरों से वंचित हो जाते थे। नक्सलियों के खिलाफ अभियान शुरू किया गया और इस अभियान में सफलता भी मिली। अब इन इलाकों में विकास की गति तेज हुई है। विकास के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए 200 से अधिक स्कल खोले गए हैं। हजारों पोस्ट ऑफिस सहित कई जनकल्याणकारी योजनाएं चालू की गई हैं। आत्मसमर्पित नक्सलियों को मौका दिया गया है। सबका साथ सबका विकास अभियान के तहत एक नई उर्जा दी गई है।उन्होंने कहा कि बस्तर के बच्चे अब बंदूक नहीं स्पोर्ट्स में अपना भाग्य आजमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद खत्म हुआ है लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। दिमागी नक्सलियों ने कई संगठनों पर अपना कब्जा जमा रखा है। इन दिमागी नक्सलियों को परास्त कर देश को सुरक्षित करना है।
पीएम मोदी ने अपने बस्तर आने की सूचना पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी थी। हालांकि छत्तीसगढ़ भाजपा के बड़े नेताओं और अफसरों को भी पहले इसकी जानकारी नहीं थी। पीएम की पोस्ट के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शमां ने प्रधानमंत्री के दौरे का स्वागत किया। दिवाली के मौके पर प्रधानमंत्री पहली बार बस्तर पहुंचे। उन्होंने लगातार 13वीं बार देश के जवानों के बीच दिवाली मनाई । प्रधानमंत्री का जवानों के बीच त्योहार मनाना खास माना जा रहा है। 3 साल पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी करनपुर कैंप आए थे। 31 मार्च 2026 को बस्तर से नक्सलवाद के खात्मे के बाद बस्तर अब विकास की ओर अग्रसर हो रहा है। कभी नक्सलियों के गढ़ और खौफ के साए में रहने वाले बस्तर की भूमि पर पहुंचकर प्रधानमंत्री ने जवानों का हौसला बढ़ाया, उन्हें अपने हाथों से मिठाइयां खिलाईं और राष्ट्र के नाम उनके समर्पण को नमन किया। इस वर्ष की यह दीपावली देश के लिए बेहद ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि दशकों बाद यह पहला मौका है जब देश का प्रत्येक जिला नक्सल मुक्त माहौल में त्योहारी खुशियां मना रहा है
प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत
दीपावली के इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच विशेष विमान से सीधे जगदलपुर पहुंचे। विमानतल पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मंत्री केदार कश्यप, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव, जगदलपुर के महापौर संजय पांडे, राज्य वरिष्ठ मंत्रियों और प्रशासनिक व पुलिस के शीर्ष अधिकारियों ने प्रधानमंत्री की आगवानी की और उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद प्रधानमंत्री सीधे करनपुर स्थित सुरक्षाबलों के कैंप में पहुंचे, जहां उन्होंने जवानों के साथ वक्त बिताया।
पहली नक्सलमुक्त दिवाली
जवानों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि यह दीपावली इसलिए भी विशेष और ऐतिहासिक है क्योंकि दशकों के संघर्ष के बाद देश नक्सलवाद और माओवादी आतंक के काले साए से बाहर आ चुका है। आज देश का हर जिला नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो चुका है।
प्रधानमंत्री ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि एक समय देश के कई राज्यों के सैकड़ों जिले वामपंथी उग्रवाद की चपेट में थे, आए दिन होने वाले हमलों में जवानों और मासूम नागरिकों की जान जाती थी। पहले की सरकारों ने इस समस्या को लाइलाज मानकर छोड़ दिया था, लेकिन वर्ष 2014 के बाद दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और सही नीतियों के दम पर हालात पूरी तरह बदल गए। सुरक्षा बलों के पराक्रम की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने एक बहुत बड़ा आंकड़ा साझा किया। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि पिछले 47 वर्षों में यह पहला ऐसा साल रहा है जब ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ का एक भी जवान शहीद नहीं हुआ है। यह हमारे सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, संयम और उनकी ऑपरेशनल महारत का सीधा परिणाम है। उन्होंने बस्तर फाइटर्स के जवानों और महिला सुरक्षाकर्मियों के विशेष योगदान की भी सराहना की।
अब दिमागी नक्सलियों से मुकाबला
प्रधानमंत्री ने दो टूक शब्दों में चेताया कि अब हिंसक नक्सलवाद तो जंगलों से सिमट गया है, लेकिन समाज में छिपे ‘दिमागी नक्सलियों’ से सतर्क रहने की जरूरत है जो वैचारिक स्तर पर देश को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की मजबूत नीतियों के कारण नक्सलियों की फंडिंग और हथियारों की सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कल तक बस्तर के जिन इलाकों में शाम होते ही सन्नाटा पसर जाता था और भय का माहौल रहता था, आज वहां विकास की बहार है। सरकार की संवेदनशीलता का ही परिणाम है कि अब बस्तर के आदिवासी इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं, जिससे क्षेत्र के दिन बहुर रहे हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री ने न केवल जवानों के साथ वक्त बिताया, बल्कि उनकी पीठ थपथपाकर यह संदेश भी दिया कि पूरा देश उनके त्याग, तपस्या और बलिदान के लिए सदैव उनका ऋणी रहेगा।
