मनरेगाकर्मियों के हड़ताल को मिल रहा राष्ट्रीय स्तर पर पहचान, सोशल मीडिया में देख दीगर राज्य के मनरेगाकर्मी भी कर रहे संपर्क, मनरेगाकर्मी गांधीग्राम कंडेल में गांधीगिरी से जीत रहे ग्रामीणों का दिल

धमतरी- संचार क्रांति के इस युग में सूचनाओं का तेजी से संचार होना कोई बड़ी बात नहीं। आप कहीं पर भी बैठे बैठे मोबाइल के माध्यम से पूरी दुनिया में घटित होने वाले मौजूदा घटनाक्रम व समाचार को देख सकते हैं जान सकते हैं। इसका ताजा उदाहरण छत्तीसगढ़ में 4 अप्रैल से चल रहे मनरेगा कर्मियों के हड़ताल में देखने को मिल रहा है। दांडी यात्रा मुंडन संस्कार जल सत्याग्रह हस्ताक्षर अभियान बाइक रैली आदि विभिन्न तरीकों के फोटो एवं वीडियो फेसबुक, टि्वटर, व्हाट्सएप व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर मनरेगा कर्मी अपने हड़ताल के अपडेट शेयर कर रहे हैं जिन्हें देखकर उत्तर प्रदेश के मनरेगाकर्मी प्रदेश के मनरेगाकर्मी से संपर्क कर वस्तुस्थिति जानने में लगे हुए हैं। खास करके दंतेवाड़ा से रायपुर तक 390 किलोमीटर की पदयात्रा जिन्हें मनरेगा कर्मीयों ने दांडी यात्रा का नाम दिए हैं वह जिज्ञासा का कारण बना हुआ है।

25 अप्रैल को दांडी यात्रा धमतरी जिले के गांधीग्राम कंडेल पहुंची जहां ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया । शाम को उठान और गांधी गार्डन दीप प्रज्वलन के अलावा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर बनी लघु फिल्म दिखाई गई। 26 अप्रैल के प्रथम मनरेगा कर्मियों ने ग्राम पंचायत क्षेत्र में महात्मा गांधी के विचारों के अनुरूप गांव के गली मोहल्लों में स्वच्छता का संदेश देते हुए साफ सफाई का कार्यक्रम किया। मनरेगा कर्मियों ने यहां सन 1920 के नहर सत्याग्रह का कारण बने नगर का भी अवलोकन किया । नहर में उतर कर इन्होंने सांकेतिक रूप से नहर की साफ-सफाई कर महात्मा गांधी की जय, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव की जय, भारत माता की जय और नियमितीकरण को लेकर नारे लगाए। इन गतिविधियों के माध्यम से वे सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर खींचना चाह रहे।

ग्राम पंचायत कंडेल की सरपंच पुष्पा नेताम ने कहा कि दांडी यात्रियों ने ग्राम पंचायत में साफ सफाई कर स्वच्छता का संदेश देते हुए अपनी अपनी मांग शासन तक पहुंचाना चाहते हैं, हम आशा करते हैं कि सरकार उनकी मांगों को जल्द से जल्द पूरा करें।

18 अप्रैल को छत्तीसगढ़ राज्य के किसी भी जिले में एक भी मनरेगा के मजदूर कार्यरत नही थे। छत्तीसगढ़ मनरेगा के 16 वर्षों इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि कार्य दिवस में मजदूरों की संख्या शून्य है। इसी आंकड़े ने पूरे देश के मनरेगा कर्मियों का ध्यान छत्तीसगढ़ के हड़ताल की ओर खीचा।

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