कांग्रेस का नवा इतिहास गढ़ रहा छत्तीसगढ़

सही दशा में सही दिशा देख रहा अधिवेशन – हर्ष शुक्ला

रायपुर :- समूचे भारत में कांग्रेस के सबसे मजबूत गढ़ छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय अधिवेशन का आगाज हो गया और इसे अंजाम यानी देश का नेतृत्व पुनः प्राप्त करना है। पहला कदम जनता का विश्वास जीतना है और फिर विपक्ष की ताकत को एकजुट करना, विपक्ष के अधिकांश दलों का सर्वसम्मत नेतृत्व करते हुए भाजपा की सरकार का विकल्प बनना है। देश की जनता का विश्वास हासिल करने, जनता को कांग्रेस से जोड़ने और कांग्रेस को पहले की तरह आम जनता से जोड़ने के लिए कांग्रेस की आशाओं के केंद्र राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा में कड़ी तपस्या कर चुके हैं। उनकी यात्रा को मिले व्यापक जन समर्थन से देश भर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है। कांग्रेस देश को संदेश दे चुकी है कि सत्ता संघर्ष की राजनीति के लिए हमारे पास सक्षम युवा नेतृत्व है। व्यावहारिक सत्य है कि कोई भी एक प्रयास में देश का दिल नहीं जीत पाता। कोशिश करते रहना चाहिए। राहुल गांधी ने भाजपा के मुकाबले कांग्रेस की चुनावी हार के बाद पार्टी की अध्यक्षता छोड़ दी लेकिन मैदानी संघर्ष की कमान आज भी उनके पास है। एनडीए की अटल सरकार के खिलाफ जो संघर्ष सोनिया गांधी ने किया था, वही आज राहुल गांधी कर रहे हैं। कांग्रेस ने निर्वाचन के जरिये अनुभवी अध्यक्ष के रूप में मल्लिकार्जुन खड़गे को चुनकर साबित किया है कि कांग्रेस में ही इतना बड़ा आंतरिक लोकतंत्र है। मल्लिकार्जुन खड़गे के संगठन नेतृत्व में कांग्रेस छत्तीसगढ़ के रायपुर अधिवेशन में सही दशा में सही दिशा की तरफ बढ़ रही है। रायपुर अधिवेशन कांग्रेस के लिए नए दौर में प्रवेश का मार्ग बन सकता है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस को दिशा दिखा रहा है कि कैसे संघर्ष करके सत्ता में आया जाता है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मेहनत से कांग्रेस सीख ले सकती है। अन्य राज्यों के कांग्रेस नेता यहां भूपेश बघेल का संघर्ष देख सकते हैं, उस संघर्ष का परिणाम देख सकते हैं और उनका काम देख सकते हैं। अब रायपुर अधिवेशन इसलिए भी याद किया जा सकता है कि कांग्रेस देश की चुनावी जंग जीतने के साथ ही राज्यों में भी अपना पुराना गौरव प्राप्त करने कमर कस रही है। हिमाचल में उसने बाजी जीत ली है। इसी साल छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान के चुनाव हैं। लोकसभा चुनाव के पहले होने वाले सभी चुनाव की चुनौती कांग्रेस के सामने है कि वह कितनी मजबूत बनकर उभर पाती है। रायपुर अधिवेशन की तैयारियों में लगे कांग्रेस नेताओं के यहां प्रवर्तन निदेशालय के छापे ने इस राष्ट्रीय अधिवेशन की अहमियत और बढ़ा दी है। कांग्रेसी नेताओं के यहां प्रवर्तन निदेशालय के छापे को कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर एक चुनौती के रूप में लिया है। इस अधिवेशन से ठीक पहले कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा की गिरफ्तारी के बाद छत्तीसगढ़ की धरती से कांग्रेस नेतृत्व ने जो संदेश दिया है, वह बता रहा है कि रायपुर अधिवेशन ऐतिहासिक होगा और कांग्रेस की राजनीति के लिए टर्निंग प्वाइंट भी हो सकता है।

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