गैर आईएएस एमडी की तैनाती से छग मंडी बोर्ड का हो रहा है बेड़ागर्क



रायपुर। छत्तीसगढ़ मंडी बोर्ड का बेड़ागर्क हो रहा है। इस महकमे में गैर अनुभवी अधिकारी के भरोसे सरकार कई योजनाओं को धरातल पर उतारना उतना ही कठिन है, जितना दहकती आग से शीतलता की उम्मीद करना। एक साधारण से कांस्टेबल को सीधे पुलिस महकमे का मुखिया यानि महानिदेशक बना दिया जाए, तो महकमा निश्चित तौर पर वसूलीबाजों का गिरोह बनकर रह जाएगा, कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी। कुछ ऐसा ही हो रहा है छत्तीसगढ़ मंडी बोर्ड में, जहां मंडी सचिव पद से नौकरी की शुरुआत करने वाले श्री सवन्नी को लगातार प्रमोशन देते हुए सीधे बोर्ड के एमडी पद तक पहुंचा दिया गया है। जबकि मंडी बोर्ड का एमडी किसी आईएएस अफसर को बनाया जाना चाहिए।
अल्ला मेहरबान तो गधा पहलवान की कहावत छग मंडी बोर्ड में सही साबित हो रही है।सियासतदानों की मेहरबानी से श्री सवन्नी मंडी बोर्ड के सर्वेसर्वा बन गए हैं। अगर किसी अफसर में क्षमता और अनुभव की कमी हो तो सारा सिस्टम गड़बड़ा जाता है। संस्थान अपने काम के बजाय आपसी गुटबाजी में फंस जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड में यही देखने में आ रहा है। यहां पर एमडी के पद पर आईएएस के बजाय नान आईएएस को बिठा दिया गया है। साथ ही कई और अफसर यहां संविदा पर कार्यरत हैं। आज मंडी बोर्ड अपने संसाधनों को आगे बढ़ाने का दायित्व प्रबंधनकी शिथिलता की वजह से नहीं निभा पा रहा है। मंडी बोर्ड गौ सेवा आयोग को वृद्ध पशुओं की देखभाल के लिए अनुदान देता है। कृषि विकास निगम को बीज उत्पादन के लिए भी मंडी बोर्ड सहयोग प्रदान करता है। छत्तीसगढ़ में मंडियों के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने और बिचौलियों को हटाने की पहल का नेतृत्व मंडी बोर्ड करता है।

शुरू नहीं हो पाए पूरे गौधाम
राज्य में भाजपा सरकार आने के बाद गौ-धाम योजना शुरू की गई। सरकार के तीन साल पूरा होने को हैं, लेकिन योजना अभी 29 जगहों पर शुरू हो पाई है। इसे राज्य के सभी विकासखंडों में शुरू करने की योजना है। 1460 जगहों पर गौधाम स्थापना प्रस्तावित है, मगर मंडी बोर्ड इस मामले में नकारा साबित हो रहा है। इसके पीछे यह कहा जा रहा है कि निविदा के शर्ताें को लेकर गौ-धाम चलाने निजी संस्थाएं और एनजीओ रूचि नहीं दिखा रहे हैं। तीन बार टेंडर हो चुका है, लेकिन लोग सामने नहीं आ रहे हैं। गौधाम में अनुदान इतना कम है कि सरकार अपनी घोषणा को पूरा करने में असहाय है।

किसानों को बड़ा नुकसान
छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम, मंडी बोर्ड के सहयोग से राज्य में उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीजों का उत्पादन और वितरण सुनिश्चित करता है। बीजों का प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, और भंडारण मंडी बोर्ड के सहयोग से किया जाता है। बीज का प्रमाणीकरण, परीक्षण और वितरण प्रक्रिया में गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती है। यह देखने में आया है कि बीज की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जाता। किसानों को इससे कई जिलों में नुकसान उठाना पड़ा है। बिचौलिये आज भी सक्रिय हैं।
छत्तीसगढ़ में मंडियों के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और बिचौलियों को हटाने के लिए सरकार द्वारा व्यापक सुधार और पहल की गई है। इनका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और किसानों की आय बढ़ाना है। ई-मंडी प्लेटफॉर्म का उपयोग और 69 कृषि उपज मंडियों में दैनिक आवक और भाव की जानकारी एगमार्कनेट पोर्टल पर उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य की मंडियों में बिचौलियों के बिना खरीदी बिक्री नहीं होती। इससे किसानों को अपने भुगतान के लिए दलालों पर आश्रित रहना पड़ता है।

मंडी टैक्स के नाम पर अवैध वसूली
यहां पर मंडी टैक्स के नाम पर कर्मचारी अवैध वसूली करते देखे जा रहे हैं। राजधानी रायपुर में ही हर दिन रिंग रोड़ पर धान लेकर आए हजारों ट्रकों और अन्य वाहनों से 250 से 300 रुपए मंडी टैक्स के नाम पर लिया जाता है। विभाग का इस पर कोई लगाम नहीं है। हालांकि अन्य राज्यों से लाए गए दलहन, तिलहन एवं गेहूं पर 31 मार्च तक मंडी शुल्क और कृषक कल्याण शुल्क में पूर्ण छूट प्रदान की गई है।

सवन्नी को तीसरी बार संविदा नियुक्ति
मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक पद पर महेंद्र सिंह सवन्नी संविदा में पदस्थ होने के बाद तीसरी बार उनकी कार्य अवधि बढ़ाई गई है। वे भाजपा नेता भूपेंद्र सिंह सवन्नी के भाई हैं, इसका फायदा उन्हें भाजपा सरकार में मिला। उन्हें रिटायरमेंट के पहले ही संविदा नियुक्ति का आदेश मिल गया था। बताया जाता है कि उनके संविदा में पदस्थ होने के बाद मंड़ी बोर्ड के कार्य प्रणाली में लगातार गिरावट आई है। बोर्ड के कर्मियों का वेतन जारी करने सहायक संचालक द्वारा रिश्वत मांगने के अलावा, जो टेंडर टुकड़े-टुकड़े में होने चाहिए वह बल्क में हो रहे हैं। सी और डी वर्ग के ठेकेदारों को यहां काम नहीं मिल पा रहा है। मंडी सचिव से एमडी के पद तक पहुंचे श्री सवन्नी भी हेरफेर के चलते चर्चा में आ गए हैं।

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