गोठान को सरपंच और सचिव ने बनाया ‘चारागाह’


छोटे देवड़ा -1 के गोठान निर्माण में अनियमितता


बकावंड :- जनपद पंचायत बकावंड ब्लॉक की ग्राम पंचायत छोटे देवड़ा-1 में गोठान निर्माण में जमकर अनियमितता बरती गई है। गोधन न्याय योजना को कमाई का जरिया बना चुके सरपंच और पंचायत सचिव ने गौमाता का हक छीन लिया है।
जनपद पंचायत मुख्यालय बकावंड से 12 किलोमीटर दूर स्थित छोटे देवड़ा के मॉडल गोठान बनाने 9 लाख रुपए स्वीकृत हुए हैं। सरपंच और सचिव ने गोठान निर्माण में जमकर गड़बड़ी की है। गोठान में मवेशियों के लिए छांव, पैरा, चारा और पानी की भी व्यवस्था नहीं की गई है।मवेशियों को धूप और बारिश से सुरक्षित रखने के लिए शेड या झोपड़ी का भी निर्माण नहीं कराया गया है। पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था नहीं है।पंचायत सचिव लल्लू राम पटेल को गोठान निर्माण में गड़बड़ी को लेकर कलेक्टर ने सस्पेंड कर दिया है। उनकी जगह दूसरा सचिव नियुक्त किए जाने के बाद भी गड़बड़ी जारी रही। गोठान में मवेशियों को पानी पिलाने के लिए कराए गए टंकी निर्माण में बहुत ही कम सीमेंट का उपयोग हुआ है। वहीं शेड भी हल्के स्तर के और बहुत ही छोटे बनाए गए हैं। शेड में लगाए गए लोहे के पाईप और एंगल भी घटिया क्वालिटी के हैं। वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए टंकी स्तरहीन बनाई गई है। निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। सरपंच और सचिव ने ज्यादातर रकम हजम कर ली है। कहने को तो यह आदर्श गोठान है, मगर यह अन्य पंचायतों के लिए रोल मॉडल बन सके ऐसा नजर नहीं आता। यह गोठान भ्रष्टाचार का मॉडल जरूर बन गया है। ग्राम पंचायत के दस्तावेजों में गोठान के नाम पर लाखों रुपए खर्च किए जाने का उल्लेख हुआ है, लेकिन हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है। अभी तक गोठान का काम पूरा नहीं हो सका है।

फिर भी चलता रहा पुराना ढर्रा
गोठान का जायजा लेने कुछ माह पहले पहुंचे अधिकारी निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान रखने और कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश सरपंच को दे गए थे। उसके बाद फिर कभी जनपद पंचायत से इंजीनियर या कोई अधिकारी निर्माण कार्य का जायजा लेने के लिए छोटे देवड़ा नहीं पहुंचा। परिणाम स्वरूप सरपंच और सचिव ने गोठान निर्माण में अंधेरगर्दी जारी रखी। निर्माण में नाबालिग लडके लड़कियों से कार्य कराकर श्रम कानून का उल्लंघन भी किया गया।गोठान में अब तक गोबर की खरीदी भी शुरू नहीं हो पाई है।

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