डॉ. नाग ने कर दिया आचार संहिता का पोस्टमार्टम
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के आदेश की उड़ाई धज्जियां
रायपुर :- राज्य शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के एक डॉक्टर ने आदर्श चुनाव आचार संहिता का पोस्टमार्टम कर डाला है। ये डॉक्टर हैं केके नाग, जिन्हे कुछ दिनों पहले ही बस्तर संभाग में विभाग का संयुक्त संचालक नियुक्त किया गया है। डॉ. केके नाग ने आचार संहिता का खुला उल्लंघन करते हुए एकतरफा पदभार ग्रहण किया है। जबकि आचार संहिता के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता।
जगदलपुर स्थित जिला चिकित्सालय महारानी अस्पताल के चिकित्सक एवं पैथोलॉजिस्ट डॉ. केके नाग की पद स्थापना संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं बस्तर संभाग के पद पर चुनाव आचार संहिता लगने के कुछ दिनों पहले 6 अक्टूबर को की गई थी। डॉ. नाग ने उस समय अपना नया पदभार ग्रहण नहीं किया। आचार संहिता लागू हो जाने के बाद उन्होंने 12 अक्टूबर को एकतरफा पदभार सम्हाल लिया। इस बात की पुष्टि स्वयं डॉ. केके नाग ने अपने एक परिपत्र में की है। 12 अक्टूबर की तिथि पर जारी इस विभागीय सर्कुलर में लिखा है कि छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय महानदी भवन रायपुर के आदेश दिनांक 6- 10- 2023 के तहत मेरी पद स्थापना प्रभारी संयुक्त संचालक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग बस्तर जगदलपुर के पद पर की गई है। इस आदेश के परिपालन में मेरे द्वारा दिनांक 11- 10- 2023 को एकतरफा पदभार ग्रहण कर लिया गया है। भविष्य में विभाग के समस्त शासकीय कार्य मेरे द्वारा संपादित किए जाएंगे। डॉ. केके नाग ने इस सर्कुलर की प्रतिलिपि विभाग के अवर सचिव व संचालक, संभाग आयुक्त, बस्तर, सुकमा, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा व बीजापुर जिलों के कलेक्टरों, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों, सिविल सर्जनों, अस्पताल अधीक्षकों और जिला कार्यक्रम अधिकारियों को भी प्रेषित की है। डॉ. केके नाग का यह कदम चुनाव आचार संहिता का खुला उल्लंघन है। केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने विधानसभा चुनाव के परिप्रेक्ष्य में छत्तीसगढ़ में आदर्श आचार संहिता 9 अक्टूबर से ही लागू कर दी है। डॉ. नाग के चुनाव आचार संहिता विरोधी कदम की तस्दीक राज्य की मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रीना बाबा साहेब कंगाले द्वारा जारी सर्कुलर से भी होती है।

क्या कहता है नियम
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 28 (क) के अनुसार चुनाव तिथियों के लिए अधिसूचना जारी होते ही समस्त शासकीय अधिकारी कर्मचारी निर्वाचन आयोग की प्रतिनियुक्ति पर समझे जाते हैं। छत्तीसगढ़ की मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रीना बाबासाहेब कंगाले ने शिक्षकों व विभागीय अधिकारियों के तबादले व पदस्थापना के संदर्भ में छत्तीसगढ़ शासन के शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के नाम जारी पत्र में इस बात का उल्लेख किया है। सुश्री कंगाले ने इस पत्र में लिखा है कि आदर्श आचार संहिता प्रभावशील होने के बाद किसी भी अधिकारी – कर्मचारी को नियुक्ति, स्थानांतरण, पदस्थापना, भारमुक्ति, पदग्रहण की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके हवाले से उन्होंने शिक्षा विभाग में हुए स्थानांतरण पर यथास्थिति रखने के आदेश दिए हैं।
