जगदलपुर नगर निगम में फिर मचने वाला है बड़ा उथल पुथल



अनियमित सामान्य सभा और गंदी राजनीति है वजह
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। नगर निगम जगदलपुर के सत्ता शीर्ष पर बैठे जनप्रतिनिधियों की कुर्सी पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। निगम में एक बार फिर बड़ा सियासी उथल पुथल मचने वाला है। इस दफे नगर निगम अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। निगम नेता प्रतिपक्ष संजय पांडेय के नेतृत्व में आज भाजपा पार्षद दल ने कलेक्टर को अविश्वास प्रस्ताव लाने बाबत पत्र सौंपा।
नगर निगम जगदलपुर की सत्ता पर कांग्रेस काबिज है। महापौर सफीरा साहू और नगर निगम सभापति कविता साहू दोनों ही कांग्रेसी हैं। कहने को तो जाहिरी तौर पर नगर निगम में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत प्राप्त है, मगर सूत्र बताते हैं कि अनेक कांग्रेसी पार्षद और कुछ एमआईसी मेंबर्स नगर निगम की अपनी ही सरकार से खुश नहीं हैं। मेयर और सभापति के कामकाज के तरीकों को लेकर उनमें नाराजगी है। ऐसे असंतुष्ट पार्षद और एमआईसी मेंबर्स अंदर ही अंदर सुलग रहे हैं तथा पार्टी के प्रति वचनबद्धता के कारण वे कुछ भी कर पाने में असमर्थ हैं। ये लोग लंबे समय से मौके की तलाश में हैं और मौका मिलते ही चौका लगाने के लिए बेताब हैं। अगर भाजपा के पत्र को कलेक्टर ने मंजूर कर लिया और अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा एवं मतदान के लिए तिथि तय कर दी, तो उस समय ये नाराज पार्षद एवं एमआईसी सदस्य अपनी पूरी भड़ास व खीझ निकालने उतारने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष संजय पाण्डेय का कहना है कि मेयर जहां निर्दलीय एवं भाजपा पार्षदों के वार्डों की घोर उपेक्षा कर रही हैं, वहीं सदन संचालन में सभापति कविता साहू तटस्थ भाव का पालन नहीं करतीं। उनका झुकाव हमेशा सत्तापक्ष की ओर रहता है। वे निष्पक्ष होकर सदन चलाने में असमर्थ हैं तथा जानबूझकर ऐसा करती हैं। संजय पाण्डेय ने कहा कि निगम अध्यक्ष कविता साहू के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव वास्तव में निगम में व्याप्त दलगत गंदी राजनीति , भारी भ्रष्टाचार, अनियमित सामान्य सभा और बहुमत की दादागिरी के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के किसी भी सदन के सभापति को निष्पक्ष रहकर अपना दायित्व निभाना चाहिए। सदन में संतुलन बनाए रखना सभापति का वैधानिक कर्तव्य होता है, मगर सभापति कविता साहू अपना यह कर्तव्य नहीं निभा पा रही हैं। नगर निगम सामान्य सभा की बैठकों में वे विपक्ष के साथ द्वेषपूर्ण और भेदभावपूर्ण व्यवहार करती हैं। इससे संविधान और सदन की गरिमा को ठेस पहुंच रही है। संजय पाण्डेय ने बताया कि इन बिंदुओं तथा कुछ अन्य मुद्दों के आधार पर सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने हेतु आवेदन कलेक्टर को दिया गया है। कलेक्टर से आग्रह किया गया है कि जल्द से जल्द नगर निगम की विशेष बैठक बुलाकर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा व मतदान की प्रक्रिया पूरी की जाए।उन्होंने विशेष बैठक के संचालन के लिए जिला प्रशासन के किसी निष्पक्ष और जिम्मेदार अधिकारी को दायित्व सौंपने का आग्रह भी कलेक्टर से किया है।

लंबे समय से चल रही सुगबुगाहट
भाजपाई और निर्दलीय पार्षद लंबे समय से महापौर एवं सभापति से खार खाए बैठे हैं। संजय पाण्डेय समेत सभी भाजपा पार्षदों व निर्दलीय पार्षदों का आरोप है कि महापौर सफीरा साहू नगर की प्रथम महिला होने के अपने दायित्व का निर्वहन ईमानदारी के साथ नहीं कर रही हैं। वे विकास, साफ सफाई एवं निर्माण कार्यों के मामले में भाजपाई एवं निर्दलीय पार्षदों के वार्डों की शुरू से घोर उपेक्षा करती आ रही हैं। जिन वार्डों से गैर कांग्रेसी पार्षद जीतकर आए हैं, उन वार्डों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। इससे नागरिकों में भी आक्रोश है। नगर निगम के निर्माण कार्यों और सामग्री खरीदी में कमीशनबाजी का खुला खेल चल रहा है। इन वजहों से मेयर के खिलाफ असंतोष फूट पड़ा है। संजय पाण्डेय ने सभापति को भी आड़े हाथ लेते हुए कहा कि वे महापौर की कठपुतली बनकर काम कर रही हैं। उन्हें अपने पद की मर्यादा का भी ध्यान नहीं है। ज्ञात हो कि सालभर पहले भाजपा पार्षद दल ने महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की पहल की थी। कलेक्टर को पत्र भी सौंपा गया था, मगर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार रहने के कारण भाजपा पार्षदों की दाल नहीं गल पाई थी। अब राज्य में भाजपा की सरकार है और भाजपा पार्षदों को भरोसा है कि इस बार कलेक्टर विशेष बैठक बुलाकर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा एवं मतदान जरूर कराएंगे।

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