लोक निर्माण विभाग में कार्यों की जांच के नाम पर ठेकेदारों को किया जा रहा है टार्चर



रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के लोक निर्माण विभाग में अजब गजब खेल चल रहा है। विभाग के इंजीनियर इन चीफ (इएनसी)
ने कार्यों की गुणवत्ता की जांच के नाम पर ठेकेदारों को प्रताड़ित करने की प्रथा विभाग में चला रखी है। जांच के नाम पर बनी बनाई पूरी सड़क को उधेड़ कर रख दिया जा रहा है। इस करतूत से राज्य भर के ठेकेदार परेशान हैं। उन्हें भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है और मानसिक यंत्रणा के दौर से गुजरना पड़ रहा है। कुछ ठेकेदार तो आत्महत्या तक कर लेने की बात कहने लगे हैं।
राजधानी में बैठे लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर इन चीफ श्री पिंपरी की कार्यप्रणाली से पूरे छत्तीसगढ़ के विभागीय ठेकेदार परेशान हो उठे हैं। बस्तर जैसे घोर नक्सल प्रभावित संभाग के सुदूर गांवों में अपनी जान जोखिम में डालकर और और अपने करोड़ों रुपयों के वाहनों, यंत्रों और उपकरणों को दांव पर लगाकर काम करने वाले ठेकेदारों को भी इएनसी और उनके मातहत अधिकारियों द्वारा जमकर प्रताड़ित किया जा रहा है। यह सर्व विदित तथ्य है कि बस्तर के धुर नक्सल समस्या ग्रस्त गांवों में सड़क, पुल पुलिया भवन आदि जैसे निर्माण कार्यों को पूर्ण कराना कोई हंसी मजाक का खेल नहीं है। इस तरह के निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदारों, उनके कर्मचारियों, मजदूरों की जान पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। निर्माण में लगे वाहनों, भारी मशीनों, उपकरणों और यंत्रों में आएदिन आगजनी की घटनाएं होती रहती हैं। बावजूद ठेकेदार अपने परिवार का गुजारा करने के लिए यह जोखिम उठाते हैं। लेकिन शायद लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर इन चीफ को ठेकेदारों की इस त्रासदी से कोई वास्ता नहीं है। उल्टे वे ठेकेदारों की परेशानी को और भी बढ़ाने का काम कर रहे हैं। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखना और उनकी जांच करना लोक निर्माण विभाग के इएनसी और अन्य अधिकारियों का दायित्व है, मगर जांच के नाम पर बनी बनाई सड़क को पूरी तरह उधेड़ देना कतई तर्क संगत नहीं है। पिछले लंबे समय से लोक निर्माण विभाग में नव निर्मित सड़कों को उखाड़ कर जांच करने की तानाशाही प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया जाने लगा है। बस्तर संभाग में करोड़ों रुपए खर्च कर बनाई गई सड़कों को विभागीय अधिकारी उधेड़वा दे रहे हैं। जिस सड़क को बनाने में ठेकेदार, उनके कर्मचारी और मजदूर हफ्तों पसीना बहाते हैं, करोड़ों रुपए लगा देते हैं, उस सड़क को विभाग के अधिकारी चंद घंटे में नेस्तनाबूद कर देते हैं।जबकि केवल थोड़ी सी छेद कर जांच करने का प्रावधान है। मगर इस प्रावधान के विपरीत जाकर अधिकारी ठेकेदारों को जानबूझ कर परेशान करने पर तुल गए हैं।

पिस रहे हैं निर्दोष ठेकेदार
ठेकेदार अगर दर बढ़ाकर कार्य लेता है, तो सरकार को चूना लगाने और मिलीभगत से कार्य लेने का आरोप लगता है। वहीं कम दर पर काम लेने से ठेकेदार पर भ्रष्टाचार और गुणवत्ता को नजर अंदाज करने का इल्जाम लगाकर कर कई प्रकार की जांच की जाती है।पिछले कई माह से बस्तर संभाग के ठेकेदार इएनसी की गैर जिम्मेदाराना हरकत से नाराज चल रहे हैं। पिछले दिनों एक ठेकेदार और एसी या ईई में हुई मारपीट भी इएनसी की मनमानी का ही परिणाम है। अधिकारी जांच के नाम पर ठेकेदार को काफी परेशान करते हैं। जिससे समूचे प्रदेश के ठेकेदार अब या तो संबंधित अधिकारी से उलझने लगे हैं या फिर काम छोड़ने की सोच रहे हैं। वहीं कुछ ठेकेदार अपने अधिकारियों की मनमानी के चलते आर्थिक और मानसिक रूप से इस कदर टूट चुके हैं कि वे आत्महत्या कर लेने की बात तक कहने लगे हैं।

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