चित्रकोट के झरने की तरह झर झर बहने लगीं पथरा चुकी बूढ़ी आंखें

जगदलपुर। अपनों के इंतजार में पथरा चुकी बूढ़ी आंखें चित्रकोट जल प्रपात की तरह झर झर बहने लगीं, बुजुर्ग माताओं के खुशियों को पंख लग लग गए। जो सपने बेटे बहू पूरे नहीं कर पाए, उन सपनों को बस्तर कलेक्टर हरिस एस ने पंख लगा दिए।
दरअसल ये बुजुर्ग महिलाएं अपनों की ठुकराई हुई और परिस्थितियों की मारी हुई हैं। उन्हें रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा संचालित के आस्था निकुंज वृद्धाश्रम में पनाह मिली हुई है। नाती, पोतों, बेटे, बेटियों से दूर रह रही इन बुजुर्गों की पूरी दुनिया सिर्फ इसी वृद्धाश्रम में सिमटी हुई है। बस्तर में रहकर भी वे उस जन्नत का नजारा नहीं देख सकी थीं, जिसके दीदार के लिए देश दुनिया के लोग जगदलपुर आते हैं। इन बुजुर्गों के लिए कलेक्टर हरिस एस और रेडक्रॉस सोसायटी एवं वृद्धाश्रम से जुड़े लोग संतान बनकर सामने आए।

कलेक्टर की पहल पर इन बुजुर्ग महिलाओं को चित्रकोट वाटर फॉल का भ्रमण कराया गया। चित्रकोट जलप्रपात का दर्शन कर बुजुर्ग महिलाओं की खुशी का कोई पारावार नहीं था। नजरों के सामने बहते झरने की तरह उनकी आंखें भी झर झर कर बहने लगीं। ये खुशी के आंसू थे। इन महिलाओं ने जाहिर करते हुए कलेक्टर हरिस एस तथा रेडक्रास के सभी सदस्यों को दिल से आशीर्वाद दिया। 98 वर्षीय रामबती, 95 वर्षीय सोनदई सहित गीता, शांति, राधा, दसरी, सोनी, सोनादाई, पार्वती, गागरी, राजू बाला चित्रकोट जलप्रपात का नजारा देख अभिभूत हो उठी थीं। उन्हें इस बात का मलाल था कि उनकी संतानों ने कभी उन्हें कहीं नहीं घुमाया।प्रबंधक अनिल देवांगन, प्रिया, वर्षा, ज्योति, सविता, ईतेंद्र, रितेश सेठिया, डिप्टी डायरेक्टर सुचित्रा मिंज, तहसीलदार कैलाश पोयम, संतोष एस., विवेक सिंह, उपाध्यक्ष अलेक्जेंडर आदि ने बुजुर्ग महिलाओं के इस भ्रमण में सहयोग किया।महिलाओं ने इन लोगों को भी दुआएं दी।

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