इस कीचड़ में इसीलिए तो नहीं खिल पा रहा है कमल…

अर्जुन झा-
जगदलपुर। गत लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में भाजपा ने बस्तर संभाग में बेहतरीन परफॉरमेंस दिखाया, मगर बीजापुर जिले के कीचड़ में वह कमल नहीं खिला पाई। वजह है ग्रामीणों की समस्याओं की अनदेखी। हर साल बरसात का मौसम एक ग्राम पंचायत की तीन बस्तियों के लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन जाता है। इन बस्तियों में भरपूर कीचड़ है, पर उस कीचड़ में भाजपा का कमल नहीं खिल पा रहा है।

यह दुखभरी कहानी है बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड की ग्राम पंचायत रूद्रारम की। यहां वर्षों से आवागमन की सुविधा के लिए ग्रामीण तरस रहे हैं। ग्राम पंचायत में गुहार लगाई, शिविरों में भी आवेदन दिया, मगर अब तक कोई भी समाधान नहीं निका ल गया। रूद्रारम के पंचायत सचिव और पूर्व सरपंच की लापरवाही के चलते ग्रामीणों को आज भी मूलभूत सुविधा के लिए जूझना पड़ रहा है। पंचायत के तीन वार्ड गेर्रागुड़ा, यालमपारा और सोढ़ीपारा की बस्तियां बीते करीब 25 वर्षों से कीचड़ से लबरेज हैं। रास्तों पर कीचड़ का सैलाब आया हुआ है। इन रास्तों पर बारिश में एक फीट तक कीचड़ भरा रहता है, जिससे गांव वालों को आवागमन में तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है।

सचिव–सरपंच बने रहे बेपरवाह
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण को लेकर उन्होंने ग्रामसभा बैठकों, पंचायत स्तर की चर्चाओं और प्रशासनिक शिविरों में कई बार आवेदन दिए, लेकिन नतीजा शून्य रहा। सीसी रोड तो दूर, मुरमीकरण तक का नामोनिशान नहीं है। हर बार सचिव और पूर्व सरपंच ने सिर्फ आश्वासन दिया, लेकिन न काम शुरू हुआ, न सड़क बनाई।

बच्चों की पढ़ाई चौपट, मरीज त्रस्त
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बरसात में सड़कें एक फीट कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं। हालात इतने खराब हैं कि बच्चों का स्कूल जाना और मरीजों का अस्पताल पहुंचना तक मुश्किल हो जाता है। एम्बुलेंस यहां तक नहीं पहुंचती, मरीजों को कंधे पर उठाकर एम्बुलेंस तक पहुंचाना पड़ता है। वहीं बच्चे स्कूल पहुंचते तक कीचड़ से लथपथ हो जाते हैं। कीचड़ भरे रास्ते को पार करने में जो मेहनत लगती है, उसकी थकावट के कारण बच्चे न स्कूल में मन लगाकर पढ़ाई कर पाते हैं और न घर लौटकर। कुल मिलाकर इन बच्चों का भविष्य कीचड़ में समाता जा रहा है।

डकार गए 91 लाख रुपए
खबर है कि सड़क निर्माण के नाम पर रूद्रारम पंचायत में 91 लाख रुपए की हेराफेरी हुई है। जब ग्रामीणों ने सचिव से सवाल किया कि सड़क क्यों नहीं बनी, तो सचिव ने साफ कहा कि फंड नहीं आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि 15वें वित्त से बीते 4 वर्षों में लगभग 91 लाख की राशि पंचायत को मिली, जिसे कहां खर्च किया गया इसका कोई हिसाब नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव को जब भी गांव की बैठकों में बुलाया जाता है, वह या तो आते नहीं हैं, और अगर आते हैं तो कुछ देर बैठकर बिना जवाब दिए चले जाते हैं। इससे स्पष्ट है कि सचिव और पंचायत का रवैया जनसमस्याओं के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील है।वहीं जब दलदल भरी सड़क के मुद्दे को लेकर जनपद सीईओ सुरेश देवांगन के पास पहुंचे तो उन्होंने कोई भी बयान देने से साफ इंकार कर दिया। जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए नजर आए।

कलेक्टर से मिलेंगे ग्रामीण
ग्रामीण इस पूरे मामले की जांच करवाने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई के लिए जल्द ही जिला कलेक्टर में आवेदन देने की बात कर रहे हैं। साथ ही जल्द से जल्द इन तीनों वार्डों की सड़कों का निर्माण कराने की मांग की जायेगी, ताकि लोगों को इस बदहाली से राहत मिल सके। वहीं यह बताना भी लाजिमी है कि बीजापुर विधानसभा सीट को भाजपा ऎसी ही जन समस्याओं के चलते नहीं जीत पा रही है। भाजपा को अगर बीजापुर में कमल खिलाना है, तो उसे ग्रामीणों को ऎसी समस्याओं के दलदल से मुक्ति दिलाने के लिए ठोस पहल करनी होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *