आदिवासियों की आजीविका और उनके बच्चों की शिक्षा के दुश्मन बन गए हैं नक्सली
–अर्जुन झा-
जगदलपुर। जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों के हक की दुहाई देने वाले नक्सलियों का दोहराचरित्र लगातार उजागर हो रहा है। असल बात तो यह है कि नक्सली आदिवासियों की आजीविका के साधन और उनके बच्चों की शिक्षा के दुश्मन बन गए हैं। दो दिन पहले आईईडी ब्लास्ट में तीनआदिवासियों को गंभीर रूप से घायलकर चुके नक्सलियों ने बीती रात दो शिक्षादूतों को मुखबिरी का आरोप लगाकर मार डाला। ये दोनों शिक्षादूत भी आदिवासी युवा थे और आदिवासी बच्चों का भविष्य संवारने में जुटे हुए थे।
सुरक्षा बलों से करारी मात खाने के बाद नक्सली निरीह आदिवासियों, आदिवासी युवाओं और महिलाओं को निशाना बनाने लगे हैं। नक्सलियों की ऎसी ही कार्यरना करतूत बीजापुर जिले से सामने आई है। जिले के भोपालपटनम ब्लाक के दो शिक्षादूतों को मुखबिरी के आरोप में 14 जुलाई की रात नक्सलियों ने मार डाला और उनके शवों को गांव के समीप डाल दिया। सूत्रों ने बताया कि इन दोनों शिक्षादूतों को एक दिन पहले शाम को नक्सलियों ने घर से अगवा किया था। इस घटना से शिक्षादूत संघ काफी आहत है। ब्लॉक भोपालपटनम की टेकमेटा प्राथमिक शाला के शिक्षादूत सुरेश मेट्टा और पीलूर की प्राथमिक शाला के शिक्षादूत विनोद मडे़ सन् 2019 से कार्यरत थे। सूत्रों ने बताया कि शिक्षादूतों का गांव से ब्लाक मुख्यालय जाना आना लगा रहता था। इससे नक्सलियों को शक हुआ कि ये शैक्षिक काम के साथ पुलिस की मुखबिरी भी करते हैं। सूत्रों ने ग्रामीणों के कथन अनुसार बताया कि नक्सलियों ने इन्हें पहले भी मुखबिरी न करने की चेतावनी भी दी गई थी। दोनों स्कूल भोपालपटनम क्षेत्र के हैं। फरसेगढ़ थाने में इस मामले की एफआईआर दर्ज हुई है। बीजापुर जिला पुलिस द्वारा इस घटना की अभी तक पुष्टि नहीं की गई है। इस घटना की शिक्षादूत संघ ने घटना की निंदा करते हुए कहा है कि हम अपने आपको असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। बंद शालाओं का संचालन करने में अहम भूमिका निभाने वाले शिक्षादूत अपनी सेवा सुरक्षा की मांग करते आ रहे हैं। महज दस हजार रुपए मासिक मानदेय पर स्कूल संचालन कर शिक्षादूत बस्तर संभाग में आदिवासी बच्चों का भविष्य संवारने काम करते आ रहे हैं।
कर चुके हैं 7 शिक्षादूतों की हत्या
शिक्षादूत संघ के जिलाध्यक्ष सुरेश कोरम ने बताया कि इस तरह की घटना से शिक्षादूतों में दहशत है। कोरम ने यह भी बताया कि अब तक बीजापुर में 5 और सुकमा में 2 शिक्षादूतों की हत्या नक्सली कर चुके हैं। बीजापुर जिले की 299 प्राथमिक शालाओं में 332 शिक्षादूत विभिन्न कठिन परिस्थितियों में रहकर भी सेवा दे रहे हैं। संघ के जिलाध्यक्ष व सचिव ने बताया कि शासकीय काम से भी शिक्षादूतों के ब्लाक व जिला मुख्यालय जाने को माओवादी शक की नजर से देख रहे हैं। इस बीच जानकारी मिली है कि इस घटना की सूचना मिलने पर फरसेगढ़ व भोपालपटनम से सुरक्षा बलों को पीलूर के लिए रवाना किया गया है। दोनों शिक्षादूतों के शवों को सुरक्षित लाने की चुनौती फोर्स के सामने बनी हुई। इन दोनों शिक्षादूतों की हत्या गला घोंटकर या धारदार हथियार हुई इसकी जानकारी मिलना शेष है।
