पशु सखियां गांवों में दिखाएंगी हुनर
जगदलपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त बनाने और पशुधन से संबंधित गतिविधियों को मजबूत करने के लिए 17 दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन के मुख्य आतिथ्य में कुम्हरावंड स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में सोमवार को किया गया।
मुख्य अतिथि प्रतीक जैन ने इस अवसर पर कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं पशु पालन से संबंधित तकनीकी जानकारी जैसे पशु स्वास्थ्य, उनके उचित रख-रखाव, पोषण प्रबंधन, पशुओं की विभिन्न बीमारियों एवं समाधान के बारे में कुशल होकर अपने क्षेत्र के पशुपालकों के हित में कार्य करते हुए अपनी आय में भी वृद्धि कर सकती हैं। विशिष्ट अतिथि के रूप में पशु सेवाएं बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक डॉ. डीके नेताम ने 17 दिवसीय प्रशिक्षण अनुसूची के बारे में प्रशिक्षणार्थियों को बताया। डॉ. नेताम ने कहा कि पशु सखियों को पशु पालन में सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक रूप से कुशल बनाया जाएगा, जिससे वे ग्रामीण स्तर पर बेहतर पशुपालन, टीकाकरण, बीमारी इलाज, कृत्रिम गर्भाधान इत्यादि में आत्मनिर्भर रूप से पशुओं का इलाज सकेंगी। इसके लिए पशु सखियों को प्रयोगिक एवं भ्रमण के माध्यम से कुशल बनाया जाएगा। केंद्र के प्रमुख डॉ. संतोष नाग ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड, पशुपालन एवं डेयरी विभाग और ग्रामीण विकास मंत्रालय सरकार के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम पशुधन उत्पादन के स्वास्थ्य और विस्तार एवं संबंध में पशुसखियों को संक्षिप्त जानकारी दी। प्रशिक्षण अंतर्गत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की 27 पशुसखियों को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड से पंजीकृत कर प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिनका चयन जिला पंचायत बस्तर के मार्गदर्शन में बस्तर जिले के सभी 7 विकासखंडों को सम्मिलित करते हुए किया गया है।
शुभारंभ कार्यक्रम में 27 पशु सखियों सहित, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. राहुल साहू, इंजीनियर कमल ध्रुव, दुष्यंत पाण्डेय, दिनेश ध्रुव, पशुपालन विभाग से डॉ. आलोक भार्गव, डॉ योगेश देवांगन, डॉ. शेफाली मेश्राम, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. नवीन साहू एवं राजकुमार देवांगन उपस्थित थे।
