15वीं वित्त योजना सरपंच सचिव के लिए बनी कामधेनु!

अर्जुन झा-
बकावंड। केंद्र और राज्य सरकारों ने गांवों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अनेक योजनाएं लागू कर रखी हैं। इन्ही में से एक है 15वीं वित्त योजना। इस मद में हर पंचायत को केंद्र सरकार लाखों रुपए आवंटित करती है, मगर यह योजना सरपंचों और सचिवों के लिए कामधेनु गाय साबित हो रही है। पंचायत में बिना कोई काम कराए ही सरपंच सचिव इस मद की राशि डकार रहे हैं।
15वें वित्त की राशि में हेराफेरी का ताजा मामला बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत रायकेरा देवड़ा से सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है है कि 15वें वित्त की राशि से ग्राम पंचायत में एक भी काम नहीं कराया गया है मगर सरपंच और सचिव ने विभिन्न कार्यों के नाम पर करीब ढाई लाख रुपए हड़प लिए हैं। हद तो तब हो गई जब सरपंच और सचिव ने नए बने ग्राम पंचायत भवन की मरम्मत के नाम पर 48 हजार 200 रुपए आहरित कर लिए। क्षेत्र क्रमांक 18 की जनपद सदस्य खेमेश्वरी कश्यप, रायकेरा देवड़ा की उप सरपंच एवं वार्ड 10 की पंच मीना कश्यप, पंच बुसाय झाली, लक्ष्मनी बघेल, सुबोध परगनिया, सलीम नाग, बंटू कश्यप, बनमाली गोयल, समंदु राम भारती, शंकर नाग, अन्नी भारती, मुन्नी भारती, लक्ष्मनी नेताम, विमला गोयल आदि ने मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से की है। शिकायत में बताया गया है कि सरपंच लखमी कश्यप और सचिव पदमावती कश्यप ने 15वें वित्त मद से 2 जून 2025 को हैंडपंप में मोटर पंप स्थापित करने के नाम पर 35 हजार रुपए निकाले, काम कराया नहीं, 16 जुलाई 2025 को रोड मरम्मत के नाम पर 39 हजार रुपए निकले, मगर मरम्मत कार्य कराया ही नहीं गया है, 16 जुलाई 2025 को ही स्कूल भवन मरम्मत के नाम पर 48 हजार 070रुपए निकाले मगर किसी तरह का मरम्मत कार्य हुआ ही नहीं है। इसी तरह 16 जुलाई 2025 की तिथि में ही पंचायत भवन मरम्मत के नाम पर 48 हजार 200रुपए आहरित किए गए हैं, जबकि ग्राम पंचायत भवन नया बना हुआ है और उसमें किसी तरह की मरम्मत की जरूरत ही नहीं है। इस तरह सरपंच और सचिव ने सरकारी धन की बंदरबांट कर ली है।जपं खेमेश्वरी कश्यप ने खोला मोर्चा
दरअसल 15वें वित्त की राशि सरपंच और सचिव अपने मन मुताबिक निकाल सकते हैं। इसमें अधिकारियों का कोई दखल नहीं होता और न ही तथाकथित कार्यों का लेखा जोखा प्रस्तुत करना पड़ता है। जमीन पर काम हो या न हो सरपंच और सचिव मनचाही राशि आहरित कर लेते हैं। जब यह बात ग्रामीणों के बीच पहुंचती तब मामला आम हो जाता है। यही वजह है कि यह योजना सरपंचों और सचिवों के लिए दुधारू गाय बन गई है। वहीं क्षेत्र की जनपद सदस्य खेमेश्वरी कश्यप ने रायकेरा देवड़ा ग्राम पंचायत में चल रहे भ्रस्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। श्रीमती कश्यप का कहना है कि जनहित के लिए आई रकम की पाई पाई का हिसाब लेंगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करवा कर ही दम लेंगी।

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