कोराठा में साय के सुशासन की धज्जियां उड़ा रही है त्रिमूर्ति!

अर्जुन झा-
बकावंड। किसी भी देश, राज्य, शहर या गांव में एक ही परिवार का एकाधिकार हो जाए, तो देश, राज्य, शहर या गांव के बेड़ागर्क होना तय रहता है। और जब काम कराने में बदले की भावना हावी हो जाए तो जनता का भगवान ही मालिक रहता है। ऐसा कुछ खेल चल रहा है बकावंड विकासखंड की कोरठा ग्राम पंचायत में। जहां सरपंच, सचिव और जनपद सदस्य एक ही परिवार से हैं, ऐसे में तानाशाही और मनमानी स्वाभाविक है।

बकावंड ब्लॉक की ग्राम पंचायत कोरठा में सुशासन को बड़े मियां, छोटे मियां और मेम साहब का एकछत्र राज चल रहा है। बड़े मियां सरपंच हैं, छोटे मियां पंचायत सचिव हैं और करेला, ऊपर से नीम चढ़ा यह कि सरपंच की पत्नी उसी क्षेत्र की जनपद सदस्य हैं। इस परिवार का कोरठा पंचायत में सालों से दबदबा चला आ रहा है। नतीजतन वहां स्वेच्छाचारिता बढ़ गई है। निर्माण और विकास
कार्य कराने के मामले में खुलकर भेदभाव किया जा रहा है। जिन वार्डों से सरपंच और जनपद सदस्य को कम वोट मिले थे, उन वार्डों में विकास एवं निर्माण कार्य नहीं कराए जा रहे हैं। कोरठा पंचायत की आश्रित बस्ती झिटकागुड़ा पारा को पूरी तरह उपेक्षित छोड़ दिया गया है। शासन द्वारा दी जाने मूलभूत सुविधाओं और योजनाओं से झिटकागुड़ा पारा को वंचित कर दिया गया है। यहां सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंचाई जा रही हैं। बस्ती की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। गांव के नरेश, नरेंद्र, अजय, बलराम, कृष्णा, अनिता, राधा, सुरेश जायसन, गोपाल, आकाश, रमेश, लखिंधर, मनीराम आदि ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत में जिस वार्ड से वोट नहीं मिलता है उस वार्ड को द्वेषवश विकास से दूर रखा जाता है। सचिव खगेश्वर कश्यप हैं, उनके बड़े भाई नरसिंग कश्यप कोरठा पंचायत के सरपंच हैं और इस क्षेत्र की जनपद सदस्य हैं सचिव की पत्नी दयंती कश्यप। सरपंच नरसिंग कश्यप सचिव जैसा कहते हैं, वैसा ही करते हैं। ये तीनों सालों से झिटकागुड़ा बस्ती के साथ सौतेला व्यवहार करते आ रहे हैं।सरपंच, सचिव तो झिटकागुड़ा को उपेक्षित रखे ही हुए हैं, जनपद सदस्य भी है वोट बैंक के चलते इस बस्ती के साथ सौतेला व्यवहार कर रही हैं। झिटकागुड़ा के ग्रामीण नाली, लाइट, पानी, सड़क के लिए पंचायत में कई बार गुहार लगा चुके हैं, फिर भी त्रिमूर्ति का व्यवहार पक्षपात पूर्ण बना हुआ है। इससे झिटकागुड़ा के ग्रामीणों में आक्रोश पनपने लगा है।

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