धर्मांतरण; अब जाग उठा है बस्तर, भानुप्रतापपुर में खिलाफ नजर आया जनाक्रोश
जगदलपुर। धर्मांतरण से बदलती बस्तर की डेमोग्राफी से अब लोगों की नींद टूटने लगी है। गांव कस्बों में विरोध की आवाज उठने लगी है। ऐसा ही नजारा आज बस्तर संभाग के कांकेर जिला अंतर्गत भानुप्रतापपुर में देखने को मिला। यहां सनातन और सर्व हिंदू समाज द्वारा धर्मांतरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और नगर के सभी प्रतिष्ठान बंद रहे। पहले आमसभा का आयोजन हुआ, फिर विशाल रैली निकाली गई।

रैली के बाद मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और कलेक्टर के नाम ज्ञापन एसडीओपी भानुप्रतापपुर को सौंपा गया। सुरक्षा की दृष्टि से भारी पुलिस बल तैनात था। आमसभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने धर्मांतरण को एक गंभीर समस्या बताया। नगर पंचायत अध्यक्ष निखिल सिंह राठौर ने कहा कि धर्मांतरण एक संवेदनशील मामला बनता जा रहा है और इस पर सभी को एकजुट होना होगा। उन्होंने धर्म, समाज, संस्कृति और देश की रक्षा के लिए सजग रहने का आह्वान किया। राजा पांडेय ने बस्तर की संस्कृति और इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और सेवा के प्रलोभन के माध्यम से लोगों को धर्मांतरित किया जा रहा है। उन्होंने इसे एक विदेशी षड्यंत्र बताया। मोहन हरदवानी ने कहा कि आजादी के बाद से ही हिंदू समाज को तोड़ने का काम हो रहा है। उन्होंने सनातन धर्म को बचाने के लिए सभी के आगे आने की जरूरत बताई।जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र टेकाम ने शासन प्रशासन और ईसाई समाज को चेतावनी देते हुए कहा कि बस्तर में लोग देवी देवताओं को मानते हैं और प्रलोभन देकर किया जा रहा धर्म परिवर्तन स्वीकार नहीं किया जाएगा। ज्ञान सिंह गौर ने ईसाई समाज को नक्सलवाद से बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि वे भोले-भाले लोगों को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांवों की सीमाओं पर ईसाई और पादरियों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए बोर्ड लगाए गए हैं। चंद्रमौली मिश्रा ने धर्मांतरण के खिलाफ जंग छेड़ने की बात कही और प्रदेश सरकार से धर्मांतरण करने वाले लोगों को आरक्षण का लाभ न देने का कानून बनाने की मांग की।
उठाई गईं ये प्रमुख मांगें
ज्ञापन में गांवों में अवैध रूप से चल रहे ईसाई सेवा आश्रमों और प्रार्थना स्थलों को हटाने, कांकेर कलेक्टर से ईसाई समाज द्वारा की गई 5 एकड़ भूमि की मांग को खारिज करने, दुर्ग रेलवे स्टेशन पर मानव तस्करी और धर्मांतरण के आरोप में पकड़ी गई दो ननों और एक एजेंट को कड़ी सजा दिलाने, बालोद जिले के डौंडी की गौशाला से 350 गायों को कत्लखाने ले जाने के मामले में समिति सदस्यों और एजेंटों पर कार्रवाई करने, बांग्लादेश और म्यांमार से आए अवैध प्रवासियों को चिन्हित कर दंडित करने और भारत से बाहर निकालने, बस्तर में बढ़ते लव जिहाद और जमीन जिहाद को रोकने, धर्मांतरित लोगों को आरक्षण का लाभ न देने और नौकरी हासिल कर चुके लोगों को सरकारी सेवाओं को बर्खास्त करने की मांग की गई है।
