कन्वर्टेड महिला के शव के अंतिम संस्कार को लेकर गांव में विवाद
–अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर में कन्वर्जन अब सिर्फ आदिवासी संस्कृति और परंपराओं पर खतरा मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीण एकता को खंडित करने का सबब भी बन गया है। यह फूट डालो और राज करो की नीति भी साबित हो रहा है। ऐसा ही एक बड़ा मामला बस्तर के कांकेर जिले के ग्राम दुर्गूकोंदल से सामने आया है, जहां अंतिम संस्कार का मसला गांव की परंपरा और एकता का अंतिम संस्कार करता हुआ प्रतीत हो रहा है। गांव में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है
बस्तर संभाग में एक ओर जहां नक्सली आदिवासियों का नर संहार करते आए हैं, वहीं दूसरी ओर कन्वर्जन ने इस आदिम समुदाय को विलुप्ति की कगार पर पहुंचा दिया है।अपनी परंपराओं, संस्कृति और पूजा पद्धति पर अडिग आदिवासी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। बस्तर में सदियों से निवासरत गोंड़, हल्बा, मुरिया, भतरा, भतरी आदि जनजातियों का संख्या बल लगातार क्षीण होता जा रहा है। वजह साफ है- नक्सलियों के हाथों संहार और बाहरी सभ्यता का आक्रमण। यहां कन्वर्जन एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। कन्वर्टेड लोग अपनी मूल परंपरा को त्याग चुके हैं और उन्हीं की वजह से कई जगहों पर विवाद की स्थिति अक्सर निर्मित होती आई है। कांकेर जिले के ब्लॉक मुख्यालय दुर्गूकोंदल में भी ऐसा ही कुछ हुआ। यहां शुक्रवार को इसाई धर्म अपना चुकी एक महिला की मृत्यु हो गई। इस महिला के अंतिम संस्कार को लेकर दुर्गूकोंदल के ग्रामीणों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। महिला के परिजन शनिवार को अपनी ही निजी जमीन पर शव का अंतिम संस्कार करना चाह रहे थे। इससे पहले शुक्रवार की रात ग्राम पटेल व ग्राम गायता की उपस्थिति में सामाजिक लोगों और ग्रामीणों की बैठक हुई। बैठक में सभी ने एकमत होकर ईसाई धर्म मानने वाली मृत महिला के शव को दुर्गूकोंदल में अंतिम संस्कार नहीं करने देने का निर्णय सुना दिया। ग्राम पटेल ने मृतका के परिजनों को बुलाकर बताया कि ग्रामवासियों और समाज ने निर्णय लिया है कि गांव में शव का अंतिम संस्कार करने नहीं देंगे, क्योंकि महिला ईसाई धर्म में परिवर्तित हो चुकी थी। इनके शव को दफनाने से हमारे ग्राम व्यवस्था, देव व्यवस्था अपमानित होगी। मृत महिला के परिजनों ने कहा कि हमारी निजी जमीन है, हम अपनी जमीन में अंतिम संस्कार करेंगे। लेकिन ग्राम के गायता, पटेल और ग्रामीणों ने गांव की सरहद पर महिला का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। इस बीच पुलिस के अधिकारियों ने भी कहा कि जबरन अंतिम संस्कार से विवाद की स्थिति निर्मित होगी इसलिए जमीन सरकारी हो या निजी, ग्रामीणों की मंशा के अनुरूप अंतिम संस्कार ना करें। इस मसले को लेकर गांव में अभी तनाव जैसी स्थिति है।
