नौकरी भले ही पक्की नहीं, पर कर्तव्य की ललक तो पक्की है

अर्जुन झा-
जगदलपुर। बाढ़, बारिश ने बस्तर में सब कुछ तहस नहस कर दिया है। बच्चों की पुस्तक, कॉपियां तक बह गईं और उनके साथ ही बह गए पढ़ने लिखने के सपने। जब घर में अनाज का एक दाना भी न बचा हो, वैसे हालात में गरीब मां बाप के लिए अपने बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू कराना नामुमकिन ही था। घरों में चूल्हे नहीं जल पा रहे हों तो शिक्षा का उजियारा बिखरने की उम्मीद भी बेमानी सी लगती है। ऐसे में संविदा शिक्षकों ने इंसानियत और सच्चे गुरु की गुरुता की जो मिसाल पेश की है, वह निसंदेह अनुकरणीय है।

मामला बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा विकासखंड के ग्राम मांदर से सामने आया है। मांदर में वर्षा और इंद्रावती नदी की बाढ़ ने जमकर कहर ढाया है। पूरे गांव के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया था, अनाज, राशन, कपड़े, लत्ते, बच्चोँ की किताब कॉपियां, रुपए पैसेसब बह गए। घरों में चूल्हा जलना बंद हो गया। बिना पुस्तक कॉपियों के बच्चों का स्कूल जाना मुहाल हो गया था। बच्चों की पढ़ाई छूट गई। ऎसी विषम परिस्थियों के बीच
बाढ़ पीड़ित बच्चों के साथ खड़े हुए अलनार स्वामी आत्मानंद विद्यालय अलनार के संविदा शिक्षक खड़े हो गए। जिन संविदा शिक्षकों की नौकरी भी पक्की नहीं है, उन गरुजनों ने पक्की गुरुता और दृढ़ कर्तव्यपरायणता का पक्का सबूत पेश किया है। बाढ़ की विभीषिका ने मांदर गांव के कई बच्चों से उनकी किताबें, कॉपियां और बैग तक छीन लिए। परंतु शिक्षा की लौ बुझने न पाए, इसी संकल्प के साथ स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय अलनार के संविदा शिक्षकों ने एक बड़ी मिसाल पेश की है। विद्यालय के प्राचार्य अजय कोर्राम के नेतृत्व में शिक्षकों ने बाढ़ प्रभावित बच्चों को कॉपियां, किताबें और स्कूल बैग उपलब्ध कराए। इतना ही नहीं, उन्होंने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए कहा–
“पढ़ाई की राह कभी किसी आपदा से रुकती नहीं, तुम फिर से कक्षा में लौटोगे और आगे बढ़ोगे। हम तुम्हें पढ़ाने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे।” शिक्षकों का यह कदम केवल शिक्षण सामग्री देने भर का नहीं था, बल्कि बच्चों के टूटे मनोबल को संभालने का बड़ा प्रयास भी है। शिक्षकों ने अपने छोटे-छोटे प्रयासों से यह संदेश दिया है कि शिक्षा की शक्ति किसी भी कठिनाई से बड़ी होती है। इस पुनीत कार्य में विद्यालय परिवार के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों ने भी सहयोग देकर यह साबित किया है कि जब समाज का हर वर्ग मदद के लिए आगे बढ़ रहा है, तो संविदा शिक्षक भी अछूते नहीं रहे। आज अलनार के संविदा शिक्षकों ने यह दिखा दिया कि गुरु सिर्फ ज्ञान नहीं बांटते, बल्कि संकट की घड़ी में अपने शिष्यों के लिए ढाल भी बन जाते हैं।

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