धूम धाम से मनाया गया नवा खाई पर्व
जगदलपुर :- हम सब यहां बड़े हर्ष और उत्साह के साथ नवा खाई पर्व की ठाकुर / गायता जोहारनी समन्यव समिति गोंडवाना शाखा जगदलपुर बड़ी धूम धाम से बनाया गया ।नवा खाई का अर्थ है – नए अन्न का स्वागत। जब हमारे खेतों से पहली फसल आती है, तो हम उसे सबसे पहले पुरखों, धरती आया और अपने पूर्वजों को अर्पित करते हैं।नवा खाई के दिन घर में नई सदस्य (जन्म) माहला की हुई लड़की को भी बुलाकर शामिल कर परिचय के साथ परिवार में नवा खाई में शामिल करते है।
(पहले होती थी,)
इसके बाद ही हम उस अन्न का सेवन करते हैं।
दूसरा दिन ठाकुर/ गयाता जोहारनी गांव की प्रमुख ठाकुर/ गायता घर में नवा खाई जोहारनी हेतु गांव लोग एकत्रित होते है उसके बाद सभी मिल कर बड़े छोटे को आशीर्वाद लेकर फिर जोहारनी भाटा ( मैदान) या भीमा पेन जाग मैदान में पाली के लोग जोहारनी भेट मिलाप कर बड़ी हर्ष के साथ नाच,गाना रेला पाटा करके आगे साल के लिए पेन पुरखों , से आशीर्वाद लेते है।
यह पर्व हमें सिखाता है कि अन्न केवल भोजन नहीं है, बल्कि यह हमारी मेहनत, परिश्रम और प्रकृति के आशीर्वाद का फल है। नवा खाई हमें आभार व्यक्त करना और मिलजुलकर सामाजिक जीवन शैली को जीवित , रहने का सिखाता है।
बच्चे,बड़े को नई कपड़े , व बैल के प्रति मिट्टी के बैल, व कुंडी ,बुची,को प्रतीकात्म रूप से जीवन शैली के सीख, सीखते है।
जो हमेशा आपको के जुड़ी रहे।
जौहरीन दिन सुबह से बच्चे गेंदी, / गेड़ी, गांव एक जगह गेंदी पेन ठाना पे कर सेवा अर्जी कर उसे तोढ़ देते हैं, फिर गांवों में मौसमी बीमारी ,के उपयोग के बारे घर घर जा कर नाचते है
जैसे मलेरिया _ डया डया बुरसुंडी,जफा गुपा , जापा थे, कोर हवी, दफा थे,
इस प्रकार नवा खाई नई फसल धान नई बीज के साथ कुडाई पता के साथ खाने पर नई ऊर्जा पौष्टिक व,ताकत मिलती है। इस प्रकार सामाजिक एकता का पर्व ,जीवन शैली को जीवित रखने का पर्व है।
आज इस पावन अवसर पर हम सब मिलकर नये अन्न का स्वाद लेंगे, गीत गाएँगे, नृत्य करेंगे और एक-दूसरे के साथ खुशी बाँटेंगे। यही हमारी आदिवासी संस्कृति की पहचान है और यही हमारी सबसे बड़ी ताकत भी है।
हमारी फसलें हमेशा लहलहाती रहें, हमारा गांव खुशहाल रहे और हम सब इसी तरह प्रेम और भाईचारे के साथ नवा खाई पर्व मनाते रहें। अध्यक्ष गोंडवाना श्री नकुल सेवता ने कहा सुखलाल नेताम रेला पाटा की महत्व जानकारी दी
नरेश मरकाम/ माखन सोरी गोंडवाना समाज के रीति रिवाज, व पूजा , सेवा के बारे जानकारी दी।
इस कार्यक्रम में बहुत सेगोंडवाना महिलाओं ने रेला पाटा के नाच, गाना , रेला पाटा प्रतुत दी ।
इस अवसर , बी एस नेताम उपाध्यक्ष, मोती सोरी, उपाध्यक्ष
जी आर ध्रुव, डॉ राज सोरी , सुखलाल नेताम, चन्द्र कांत ध्रुव,
माखन सोरी, भानुकोडोपी , श्याम नेताम, विष्णु मरकाम, महिला प्रकोष्ठ से शीतला कोर्राम , दीपा मांझी, कांति मरकाम, संध्या मरकाम , प्रतिभा मरकाम संतोषी मंडावी, इत्यादि एवं अन्य बहुत से महिला / पुरुष उपस्थित में कार्यक्रम सफ़ल रहा
