तेंदूपत्ता बोनस घोटाले का सरगना संजय को 5 माह बाद भी नहीं पकड़ पाया एसीबी

अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर संभाग के सुकमा जिले में तेंदूपत्ता बोनस घोटाला करने वाले प्रबंधकों का सरगना किस्टाराम प्रबंधक संजय रेड्डी तक एसीबी की टीम 5 माह बाद भी नहीं पहुंच सकी है। संजय रेड्डी अब तक फरार है। वहीं एसीबी व ईओडब्ल्यू द्वारा चार्जसीट पेश की जाने के बाद चार प्रबंधकों और पूर्व डीएफओ एवं वनकर्मी को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। वहीं गोलापल्ली व पालाचलमा प्रबंधक ने जमानत के लिए आवेदन प्रस्तुत नहीं किया है।
दुब्बाकोंटा प्रबंधक पर भी ग्रामीणों ने 70 लाख रूपये के बोनस वितरण में घालमेल करने का आरोप लगाया है। ज्ञातव्य हो कि सुकमा वन मंडल के 10 लघु वनोपज सहकारी समितियों प्रबंधकों द्वारा वर्ष 2021-22 के तेंदूपत्ता बोनस वितरण में लगभग 5 करोड़ से अधिक की राशि का भ्रष्टाचार किए जाने का आरोप लगा है। इस मामले में सुकमा के पूर्व डीएफओ अशोक पटेल सहित 4 वन कर्मचारी 10 प्रबंधकों के खिलाफ 8 अप्रैल 2025 को एसीबी और ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज की थी। 17 अप्रैल 2025 को आईएफएस अधिकारी
अशोक पटेल को रायपुर से गिरफ्तार कर रिमांड पर जेल भेज दिया गया था। इसके कुछ दिन बाद ही प्रबंधकों को भी गिरफ्तार कर जेल दाखिल किया गया था।

प्रबंधकों को मिली जमानत
प्राप्त जानकारी के अनुसार चार्जशीट पेश की जाने के बाद गोलापल्ली एवं पालाचलमा प्रबंधकों को छोड़ दें तो जेल में बंद सभी प्रबंधकों को हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
जमानत मिलने से इनके परिजनों ने राहत की सांस ली है इनके परिवारों में खुशी का माहौल है।

एसीबी के हाथ नहीं आया संजय
तेंदूपत्ता बोनस घोटाला मामले में प्रबंधक का सरगना किस्टाराम प्रबंधक संजय रेड्डी 5 माह बाद भी एसीबी के पकड़ से बाहर है। इस पर लेकर सुकमा से लेकर किस्टाराम तक में चर्चा है कि सात पातालों से आरोपियों को ढूंढ निकालने वाली एसीबी की टीम संजय को आखिर कैसे गिरफ्तार नहीं कर पाई है। जबकि संजय रेड्डी पर तक किस्टाराम समिति में 37 सौ गरीबों की बोनस राशि के 78 लाख 62 हजार रुपए हजम कर जाने का आरोप है।

कब मिलेगी बोनस राशि
वर्ष 2021-22 मे इन समितियों के 34 हजार 408 संग्राहकों की 5 करोड़ 72 लाख की राशि का भ्रष्टाचार किए जाने का आरोप लगा था। अब ये तेंदूपत्ता संग्राहक आस लगाए बैठे हैं कि सरकार हम गरीब आदिवासियों को पारिश्रमिक राशि कब उपलब्ध करा पाएगी। इस घोटाले के बाद वन विभाग पूरी तरह से सर्तक हो चुकी है और भुगतान सीधा खाते में किया जा रहा है।

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