अच्छी खासी सड़क की मरम्मत के नाम पर मंजूर करवा लिए 1.10 करोड़!
जगदलपुर। नेशनल हाईवे अथॉरिटी के लोक निर्माण विभाग की एक बड़ी कारगुजारी सामने आई है। खस्ताहाल राष्ट्रीय राजमार्गो की दशा सुधारने पर विभाग के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं और जो सड़क अच्छी भली है उसकी मरम्मत के नाम पर 1.10 करोड़ रुपए मंजूर करवा लिए गए हैं। जो सड़क पहले से ही दुरूस्त है उसकी तथाकथित मरम्मत के लिए आई राशि कहां जाएगी, इसका अंदाजा आसानी सकता है।

सड़क मरम्मत के नाम पर सरकारी खजाने की लूट का यह मामला बालोद जिले से सामने आया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के लोक निर्माण विभाग ने पुरूर से झलमला तक सड़क को खराब बताकर राशि मंजूर करवा ली है। नेशनल हाइवे 930 का पुरूर से झलमला तिराहे तक का 30.6 किमी लंबा हिस्सा पूरी तरह दुरुस्त है। इस भाग पर कहीं भी मरम्मत की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद मरम्मत के नाम पर विभागीय अफसरों के माध्यम से भेजे गए प्रस्ताव पर सरकार ने 1.10 करोड़ रुपए की मंजूरी दे दी है। विभागीय अफसरों का दावा है कि काम जल्द शुरू हो जाएगा। विभाग ने नेशनल हाईवे के इस हिस्से को खराब बताते हुए प्रस्ताव भेजकर मरम्मत के नाम पर राशि स्वीकृत कराई है।इस सड़क पर सफर करने वाले लोग बताते हैं कि सड़क पूरी तरह ठीक ठाक है और आवागमन में जरा भी तकलीफ नहीं होती। फिर भी इस सड़क की मरम्मत के लिए राशि स्वीकृत कराना चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां सड़कें खराब हालत में हैं, लोग परेशान हो रहे हैं, वहां की सड़कों की मरम्मत के नाम पर अफसर लिए फंड का रोना रोते हैं। वहीं पहले से ही चकाचक सड़क की मरम्मत के नाम पर शासकीय राशि का कहां उपयोग होगा, यह सभी जानते हैं। विभागीय अफसरों का कहना है कि सर्वे के आधार पर मरम्मत कराने केंद्र सरकार से राशि जारी होती है। पहले 2.20 करोड़ से मरम्मत कराने की प्लानिंग थी, लेकिन सर्वे के एक बाद आधी राशि ही स्वीकृत हुई। विभाग के दावों के बीच हमने मरम्मत कराने योग्य सड़क की पड़ताल की तो यह सच्चाई सामने आई कि सड़क पूरी तरह ठीक है। कहीं पर भी मरम्मत कराने की जरूरत ही नहीं है। एडीबी की निगरानी में पुरूर से लेकर झलमला तिराहा तक की 30 किमी सड़क का डामरीकरण व चौड़ीकरण हुआ था। जो अब राष्ट्रीय राजमार्ग लोक निर्माण विभाग के अधीन है। इस वजह से खराब सड़क बताकर व अन्य काम कराना है यह प्रस्ताव बनाकर विभागीय अफसरों ने शासन से राशि मंजूरी कराई है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब सड़क चकाचक है तो स्वीकृत राशि को कहां खर्च करेंगे? इस संबंध में नेशनल हाइवे के एसडीओ का दावा है कि गुरूर सहित कई स्थानों में गड्ढे हो चुके हैं। इस वजह से मरम्मत कार्य के लिए प्रस्ताव भेजा गया था।
एनएच-43 पर ध्यान क्यों नहीं?
जगदलपुर- सुकमा राष्ट्रीय राजमार्ग-43 की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। वैसे तो जगदलपुर से लेकर सुकमा तक यह नेशनल हाईवे लगभग मृतप्राय हो चुका है, मगर केशलूर से तोंगपाल तक इसकी हालत बहुत ही ज्यादा दयनीय हो चली है, झीरम घाटी में सड़क गड्ढों से अटी पड़ी है, शेष हिस्सा भी ध्वस्त हो चुका है। हाईवे पर बन आए एक एक, डेढ़ डेढ़ फीट के गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं। इस नेशनल हाईवे पर चलने वाली बसों, ट्रकों, कारों और बाइक्स के पुर्जे खराब हो रहे हैं। आएदिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और जाम भी लग जाता है। हाईवे की दुर्दशा को लेकर तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने तो हाईवे के गड्ढों में खड़े होकर सड़क की दुर्दशा को लेकर प्रदर्शन किया था। इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं सुकमा जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेता दुर्गेश राय भी इस सड़क की बदहाली को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं, मगर विभाग ने कोई कदम नहीं उठाया। इसी तरह जगदलपुर- रायपुर नेशनल हाईवे भी खराब हालत में है। उसकी सुध अधिकारी नहीं ले रहे हैं।
दल्ली राजहरा बालोद मार्ग खस्ताहाल हो चुका है।
बालोद में ढूंढे नहीं मिलती सड़क
बालोद शहर में तो लोग गड्ढों में सड़क ढूंढते नजर आते हैं रहे। बालोद जिला मुख्यालय में दल्ली चौक लेकर घड़ी चौक, जयस्तंभ से मधु चौक, सदर रोड तक कई गड्ढे लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। भारी वाहनों के दबाव व बारिश की वजह से गड्डों का आकार बढ़ता ही जा रहा है, लेकिन राहत दिलाने नगर पालिका प्रशासन, पीडब्ल्यूडी के अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं। गड्ढों व इसमें भरे बारिश के पानी की वजह से लोगों को परेशानी हो रही है, इसकी जानकारी जिम्मेदार अफसरों से लेकर जनप्रतिनिधियों को भी है पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
घड़ी चौक से चंडी मंदिर के बीच सड़क पर गड्ढे हो गए हैं। शहर से बटेरा चौक डौंडी लोहारा तक पीडब्ल्यूडी की निगरानी में लगभग 18 करोड़ खर्च कर डामरीकरण कार्य कराया गया था। अब गड्ढों से राहत दिलाने मरम्मत का काम कराया जा रहा है।
एसडीओ की दलील
नेशनल हाईवे लोक निर्माण विभाग के एसडीओ अनिल कुमार का कहना है कि पुरूर से लेकर झलमला तक 30.6 किमी रोड में मरम्मत होगी। मरम्मत कराने लायक सड़क नहीं है तो कहां मरम्मत करवाएंगे? गुरूर में पूरी रोड खराब हो चुकी है। रोड के लिए सर्वे के आधार पर राशि की मंजूरी होती है। अन्य स्थानों में मरम्मत कराने की जरूरत है। मरम्मत के अलावा सड़क से मवेशियों को भगाने वाला काम भी इसी स्वीकृत राशि में शामिल है। केंद्रीय सड़क परिवहन विभाग के सर्वे के आधार पर राशि मंजूरी होती है। पहले 2.20 करोड़ की प्लानिंग थी, जो बाद में 1.10 करोड़ ही स्वीकृत हुए हैं।
