बंदूकें थामने वाले हाथ आज महक उठे गुलाब के फूलों और पावन संविधान से

अर्जुन झा-
जगदलपुर। तारीख 17 अक्टूबर, दिन शुक्रवार। यह तारीख और दिन नक्सल गढ़ बस्तर के लिए ऐतिहासिक साबित हुए हैं। जिन हाथों में नफरती बंदूकें हुआ करती थीं, उन हाथों में प्रेम के प्रतीक महकते गुलाब के फूल और पावन संविधान की प्रति देख समूचा बस्तर आल्हादित हो उठा, हर तरफ खुशी की लहर दौड़ गई।पुलिस द्वारा संचालित ‘पूना मारगेम अर्थात पुनर्वास से पुनर्जीवन’ कार्यक्रम के तहत एक बार फिर दो सैकड़ा से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया। यह प्रेरणादायक आयोजन शुक्रवार को पुलिस लाइन, जगदलपुर में आयोजित हुआ, जिसमें प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का स्वागत परंपरागत मांझी- चालकी द्वारा किया गया। उन्हें संविधान की प्रति और प्रेम, शांति एवं नए जीवन के प्रतीक लाल गुलाब भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर नक्सल उन्मूलन प्रभारी एडीजी विवेकानंद सिन्हा, सीआरपीएफ के बस्तर रेंज प्रभारी, कमिश्नर डोमन सिंह, बस्तर रेंज आईजी सुंदरराज पी., कलेक्टर बस्तर हरिस एस, बस्तर संभाग के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक, पूर्व पुलिस अधीक्षक, नक्सल उन्मूलन गतिविधियों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की भी उपस्थिति रही। डीजीपी श्री गौतम ने अपने संबोधन में कहा कि पूना मारगेम का उद्देश्य केवल नक्सलवाद से दूरी बनाना नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देना है। जो आज मुख्यधारा में लौटे हैं, वे समाज में शांति, विकास और विश्वास के दूत बनेंगे।उन्होंने आत्मसमर्पित माओवादियों से कहा कि वे अब अपने अनुभव और ऊर्जा को समाज निर्माण में लगाएं, ताकि बस्तर का भविष्य उज्ज्वल हो सके।कार्यक्रम के दौरान पुलिस विभाग द्वारा आत्मसमर्पित कैडर्स को पुनर्वास सहायता राशि, आवास और आजीविका से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन इन युवाओं को स्वरोजगार, कौशल विकास और शिक्षा के अवसर प्रदान कर रही है, जिससे वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।मांझी-चालकी प्रतिनिधियों ने कहा कि बस्तर की परंपरा और संस्कृति हमेशा से प्रेम, सह अस्तित्व और शांति का संदेश देती रही है, और जो साथी अब लौटे हैं, वे इस भावना को मजबूत करेंगे।कार्यक्रम के अंत में सभी आत्मसमर्पित माओवादियों ने संविधान की शपथ लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी निष्ठा प्रकट की। पुलिस बैंड द्वारा वंदे मातरम् की धुन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आज के कार्यक्रम में कुल 208 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें 110 महिला और 98 पुरुष नक्सली शामिल हैं। इनमें सीसीएम सदस्य 1, डीकेएसजेडसी 4,रीजनल कमिटी मेंबर 1, डीसीवीएम 21, एसीएम स्तर के 61, पार्टी सदस्य 98, पीएलजीए सदस्य, आरपीसी सदस्य व अन्य 22 नक्सली शामिल हैं।

सौंपे 153 घातक हथियार
डंडाकरण्य कमेटी के इन नक्सलियों ने बड़ी संख्या में घातक और आधुनिक हथियार भी पुलिस को सौंपे हैं। इनमें एके- 47 राइफल 19 नग, एसएलआर राइफल 17 नग, इंसास राइफल 23 नग, इंसास लाइट मशीन गन 1 नग, .303 राइफल 36 नग, कार्बाइन 4 नग, बीजीएल लांचर 11 नग, 12 बोर सिंगल शॉट 41 नग, पिस्टल 1 नग समेत कुल 153 हथियार सरेंडर किए गए हैं।

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