वन मंत्री केदार कश्यप बने खेवनहार, उठाया बंबू राफ्टिंग का लुत्फ
–अर्जुन झा-
जगदलपुर। जब खेवनहार दमदार और मजबूत इच्छाशक्ति वाला हो तो बड़े से बड़े विकराल भंवर से भी नैया पार लग जाती है। ऐसे ही भंवर से अब हमारा बस्तर भी निकल चुका है और विकास की नैया सरपट आगे बढ़ रही है। इस नैया के खेवनहार हैं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वन मंत्री एवं बस्तर के माटी पुत्र केदार कश्यप। इन दोनों की पहल पर बस्तर को विकास का नया आयाम मिल रहा है। चाहे सड़क, पुल, पुलियों, पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य का मामला हो या फिर पर्यटन का मामला हो, बस्तर हर क्षेत्र में तेज गति से तरक्की कर रहा है। पर्यटन के मामले में बस्तर को वैश्विक पहचान मिल चुकी है।

छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध तीरथगढ़ जलप्रपात क्षेत्र में अब पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण जुड़ गया है। यहां बांस से बनी नावों पर राफ्टिंग की शुरुआत की गई है, जो रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा संगम पेश करती है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने तीरथगढ़ पहुंचकर इस नई पहल का जायजा लिया और मूंगाबाहर नाले में स्वयं बांस की नाव पर बैठकर बंबू राफ्टिंग और कायाकिंग का आनंद लिया। हाथों में पतवार थामे वन मंत्री बांस की नैया को अपार जलराशि में सरपट दौड़ाते रहे। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां बस्तर में इको टूरिज्म को बढ़ावा देंगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान करेंगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ग्रामीण और वन क्षेत्रों में पर्यटन के माध्यम से आजीविका के साधन उपलब्ध कराने प्रतिबद्ध है, जिससे स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर प्राप्त हों। इस अवसर पर वन मंत्री श्री कश्यप ने इको विकास समिति के सदस्यों से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं के तहत बस्तर संभाग में पर्यटन को नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। तीरथगढ़ जैसे प्राकृतिक स्थलों में इको टूरिज्म की पहल न केवल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएगी, बल्कि बस्तर और छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगी।
