ग्रामसभा के विरोध के बाद भी जारी है मिशनरी की सभा

जगदलपुर। ग्रामसभाओं के प्रबल विरोध और जिला प्रसासन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद नानगुर क्षेत्र के गांवों में मिशनरियों के लोग प्रवेश कर धर्म सभा का आयोजन और प्रचार प्रसार कर रहे हैं। ग्रामसभाओं ने बस्तर संभाग में लागू पेसा कानून का हवाला देते हुए इन गतिविधियों को स्थानीय परंपराओं और संस्कृति पर हमला करार दिया है। क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों की ग्रामसभाओं ने इन गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग करते हुए आज फिर कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में कहा गया है कि बाइबिल प्रचार मिशन नानगुर क्षेत्र के पेसा ग्रामों में 1 से 3 नवंबर तक आयोजित महासभा पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए। बताया गया है कि ईसाई मिशनरी द्वारा बाइबिल प्रचार मिशन तहत पेसा कानून लागू क्षेत्र ग्रामों में सामग्री के साथ जोर शोर से प्रचार प्रसार किया जा रहा है। क्षेत्र में चस्पा किए गए बैनर में ग्राम डुमरगुड़ा, बड़े मुरमा में 1 से 3 नवंबर तक राज्य के बाहर के लोगों को आमंत्रित कर सभा करने की जानकारी दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि मिशनरी की प्रस्तावित महासभा हमारी परंपराओं देवी देवताओं के प्रति आस्था पर आघात पहुंचाने का षड़यंत्र है। जिस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव ग्रामसभा में पारित किया गया है। ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने जिला एवं पुलिस प्रशासन से कहा है कि यह राज्य स्थापना के रजत जयंती उत्सव को भी बाधित करने का प्रयास है।
इसलिए आयोजन पर तत्काल रोक लगाई जाए। ज्ञापन में ग्रामसभा चितलगुर, सिड़मुर, बड़े बोदल, कवालीकला, बड़े मुरमा, डुमरगुड़ा आदि गांवों की ग्रामसभाओं के अध्यक्षों और दर्जनों ग्रामीणों ने हस्ताक्षर किए हैं। बता दें कि इन गांवों के लोगों ने इस आयोजन के खिलाफ पहले भी आपत्ति दर्ज कराते हुए प्रशासन को आवेदन दिया था।

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