“वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूर्ण होने पर सेजस अलनार में हुआ भव्य देशभक्ति आयोजन
जगदलपुर। राष्ट्रगीत “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सेजस अलनार में आज एक भव्य एवं भावनात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती की वंदना और “वंदे मातरम” के सामूहिक गायन से हुई। पूरे परिसर में देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव का वातावरण गूंज उठा।
प्रधानाचार्य श्री लैखन बघेल ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि “वंदे मातरम” केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह राष्ट्र की आत्मा का प्रतीक है। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों देशभक्तों के होंठों पर प्रेरणा का मंत्र बना और आज भी हमारे भीतर राष्ट्रप्रेम की ज्योति प्रज्वलित करता है। उन्होंने कहा कि हमें इस गीत की भावना को अपने आचरण, विचार और कर्म में उतारना चाहिए, क्योंकि यही सच्ची राष्ट्रसेवा है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने “वंदे मातरम” की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, इसके रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के योगदान तथा स्वतंत्रता आंदोलन में इसके प्रभाव पर रोचक प्रस्तुतियाँ दीं। बच्चों ने देशभक्ति गीत, समूह-गायन, नृत्य और कविता-पाठ के माध्यम से भारत माता के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की।
“वंदे मातरम” 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित था और पहली बार उनकी प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ। यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन का प्राण बन गया, जिसने देश को एकता के सूत्र में बाँधने का कार्य किया।
सेजस अलनार परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम देशभक्ति की भावना और भारतीय संस्कृति के गौरव को समर्पित रहा। विद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष रूप से यादगार बना दिया।
अंत में सभी उपस्थितों ने खड़े होकर सामूहिक रूप से “वंदे मातरम” का गायन किया और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
