बस्तर के सीमावर्ती खरीदी केंद्रों में खपाया जा रहा है ओड़िशा का धान
–अर्जुन झा-
बकावंड। विकासखंड में समर्थन मूल्य पर धान खरीद का कार्य जोर शोर से चल रहा है। इसी के साथ कोचिए भी सक्रिय हो गए हैं। ये कोचिए ओड़िशा का धान यहां खपा रहे हैं। ऐसे मामलों में बकावंड एसडीएम मनीष वर्मा ताबड़तोड़ कार्रवाई भी कर रहे हैं।
बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य उड़ीसा की अपेक्षा से ज्यादा है। इस कारण उड़ीसा का धान यहां सीमावर्ती खरीदी केंद्रों में खपाया जाता है। कलेक्टर हरिस एस के निर्देश पर बकावंड एसडीएम मनीष वर्मा दिन रात गश्त लगाकर धान तस्करों को पकड़ रहे हैं। बीती रात भी एसडीएम मनीष वर्मा के मार्गदर्शन में उड़ीसा सीमा से करीबन 40 क्विंटल अवैध धान पकड़ा गया। यह धान पिकअप वाहन पर भरकर लाया जा राहा था। उड़ीसा से धान लेकर दो पिकअप वाहन निकले थे, लेकिन एक पिकअप वाहन ही पकड़ गया। पिकअप वाहन सीजी 17 एलबी 6977 को धान समेत जप्त कर बकावंड थाने के सुपुर्द किया गया।
कार्रवाई में कांस्टेबल घायल
पिकअप वाहन को रोकने के दौरान पुलिस का एक जवान गौरव सिंह ठाकुर गंभीर रूप से घायल हो गया है। घायल जवान का जिसे बकावंड सामूदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार किया गया। उसकी स्थिति खतरे से बाहर है।
ऐसे चलता है सारा खेल
बकावंड से उड़ीसा की सीमा लगी हुई है। उड़ीसा से यहां धान का परिवहन आसानी से हो जाता है। उड़ीसा के तथा स्थानीय कोचिये और बिचौलिये उड़ीसा के किसानों से 16 सौ 17 सौ रुपए क्विंटल की दर पर धान खरीद लेते हैं और उसका यहां के गांवों में भंडारण कर लेते हैं। इसके बाद यही धान बकावंड के गांवों के ऐसे किसानों के पास 24 सौ और 25 सौ की दर पर बेचते हैं, जिनके खेतों में उपज कम हुई होती है। छत्तीसगढ़ सरकार 31 सौ रुपए की दर पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीद रही है। लिहाजा कम उपज वाले किसान उड़ीसा के धान को अपनी उपज बताकर स्थानीय धान खरीदी केंद्रों में आसानी से खपा लेते हैं।बकावंड क्षेत्र के किसानों बहला फुसलाकर कर कोचिये और बिचौलिये अपने जाल में फंसा लेते हैं। जिस किसान का पंजीयन 50 क्विंटल का है, लेकिन उस किसान की धान उपज महज 30 क्विंटल होती है, ऐसे ही किसानों को कोचिये माध्यम बनाते हैं।
भौतिक सत्यापन की मांग
बकावंड ब्लाक के किसानों का मांग है कि पंजीकृत किसानों के धान का टोकन लेने के बाद खेतों व खलिहानों में धान का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए, ताकि सीधे साधे किसान कोचियों और बिचौलियों के झांसे में आने से बच सकें।
