माइनिंग टीम के आने से पहले रेत माफिया छू मंतर!



-अर्जुन झा-
बकावंड। रेत माफियाओं पर शिकंजा कसने निकले माइनिंग विभाग के अधिकारी आज पुनः खाली हाथ लौटे। बेलगांव संगम पर अवैध खनन की खबर प्रकाशन के बाद खनिज विभाग ने अपने कुछ कर्मचारी जांच पड़ताल हेतु भेजे, किंतु वे मौके पर पहुंचते, उसके पहले ही अवैध रेत खनन में लगी जेसीबी मशीन,और पोकलेन वहां से हटा दी गईं। बताते हैं कि रेत माफियाओं ने अपने मुखबिर तैनात कर रखे हैं।यही मुखबिर उन्हें हर प्रशासनिक गतिविधि की खबर पहुंचाते हैं।
सरकारी मुलाजिमों की टीम पहुंचने की खबर रेत माफियाओं को पहले ही मिल जाती है।इसके बाद से अवैध रेत खनन में लगे सारी मशीनों को हटाकर दूर ले जाते हैं। रेत माफिया उड़ीसा सीमा में प्रवेश कर इंतजार करते हैं कि कब विभाग के कर्मचारी खानापूर्ति करके वापस लौटें और हम अपना कार्य प्रारंभ करें।कुल मिलाकर गुरिल्ला तरीके से रेत स्मगलर अपने कारनामे को अंजाम दे रहे हैं। आज खबर छपते ही माइनिंग प्रभारी श्री चेरपा ने अपनी टीम को मौके पर अवश्य भेजा, किंतु विभागीय टीम के आने की जानकारी मिलते ही माफिया सतर्क होकर अपने साजो सामान हटा ले गए।श्री चेरपा ने ग्रामीणों से कहा कि अब आप लोग निश्चिंत होकर विभाग को सहयोग करें, हम रेत माफियाओं को जरूर पकड़ेंगे। किंतु हमेशा की तरह ये आए और वे चले गए। बता दें कि क्षेत्र में सक्रिय रेत माफियाओं पर शिकंजा कसने की खनिज और राजस्व विभाग की सभी कोशिशें नाकाम हो गई हैं। कई वर्षों से इस विकासखंड के इन्हीं क्षेत्रों में रेत माफिया माइनिंग विभाग के सहयोग से जगह बदल बदल कर रेत का अवैध खनन और परिवहन कर रहे हैं। हालांकि राजस्व विभाग से एसडीएम और तहसीलदार समय समय पर मौका मुआयना और कार्रवाई भी करते है किंतु इन स्मगलरों की राजनीतिक पैठ इतनी ऊंची है कि वह अपने कार्य को दिन हो या रात अंजाम देते रहते हैं।बकावंड विकासखंड के बाजावंड, बोरीगांव, बनियागांव क्षेत्र में इंद्रावती नदी एवं भास्कली नदी से माफिया रेत का दोहन कर रहे हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि पदस्थ खनिज विभाग के मौजूदाअधिकारी पिछले कई सालों से यहीं पदस्थ हैं। इन पर हर वर्ष ऐसे आरोप लगाया जाता है जिसकी जांच भी होती है किंतु कोई भी कलेक्टर इन्हें हटाने में सफल नहीं होते। कुछ लोगों के अनुसार क्षेत्र के जाने माने नेता ही इस रेत स्मगलिंग को अंजाम देते हैं। अखबार में खबर छपने के बाद रेत खनन कुछ दिन बंद कर दिया जाता है। फिर उसके बाद खनन और परिवहन जेसीबी पोकलेन और हाइवा के माध्यम से फिर दोगुनी रफ्तार से शुरू हो जाता है। उड़ीसा और बस्तर की सीमा से गुजरने वाली भास्कली नदी के साथ ही इंद्रावती नदी में भी रेत के बेतहाशा अवैध खनन से बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत बनियागांव के करीब दर्जन भर किसानों की कृषि भूमि तबाह हो चुकी है। किसान अधिकारियों के समक्ष मामले की कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। वहीं खनिज विभाग के अधिकारी दिखावे के लिए क्षेत्र में आते हैं और रहस्यमय ढंग से बिना कोई कार्रवाई किए लौट जाते हैं। बनियागांव पंचायत के पीड़ित किसान हेमराज भारती, नीलधर ध्रुव, टिकन भारती,तोशिक भारती, रूपेंद्र नागेश, जगत राम नागेश, विद्याप्रकाश सेठिया और अन्य किसानों ने मामले की शिकायत बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा से की है। शिकायत में बताया गया है कि भास्कली नदी में उड़ीसा सीमा से लगकर बेतहाशा रेत का खनन जेसीबी के जरिए कर रेत का परिवहन टिप्पर, ट्रैक्टर आदि वाहनों से किया जा रहा है। रेत निकालने के लिए नदी में करीब बीस फीट गहरा गड्ढा कर दिया गया है। इसके चलते तट पर स्थित खेतों का तेजी से कटाव हो रहा है। इसके साथ ही नदी में बाढ़ आने पर आसपास के खेतों में रेत भर जाती है। कटाव के चलते पचास एकड़ से भी अधिक कृषि भूमि नदी में समा चुकी है और रेत भरने से कई एकड़ खेती की जमीन नष्ट हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि खनिज विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के संरक्षण में यह खेल चल रहा है।किसानों ने कलेक्टर श्री छिकारा से रेत माफिया और भ्रष्ट कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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