अब अत्याधुनिक तकनीकों से संक्रमण मुक्त और सुरक्षित डायलिसिस की सुविधा मिलेगी सीसीएसएच में
जगदलपुर। बस्तर संभाग के एकमात्र सुपर स्पेशियेलिटी हॉस्पिटल कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियेलिटी हॉस्पिटल (सीसीएसएच) में अब जल्द ही अत्याधुनिक डायलिसिस की सुविधा शुरू हो रही है। यहां एक बार में एक साथ 5 मरीजों की डायलिसिस की जा सकेगी। इसके साथ ही एक कंटीन्यू रीनल रिप्लेसमेंट थैरेपी (सीआरआरटी) की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसमें क्रिटिकल मामलों के मरीजों की डायलिसिस आसान हो जाएगी। यह सीआरआरटी सुविधा पूरे बस्तर संभाग और ओडिशा राज्य के सीमावर्ती इलाकों में सिर्फ और सिर्फ सीसीएसएच में ही उपलब्ध हो रही है।

कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियेलिटी हॉस्पिटल की डायलिसिस यूनिट को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस किया गया है, जिसमें फ़्रेजीनियस कम्पनी की मशीनें और उपकरण लगाए गए हैं। फ़्रेजीनियस कम्पनी डायलिसिस केयर में विश्व की अग्रणी कम्पनियों में शामिल है।
सामान्य मरीजों की डायलिसिस इस मशीन से महज 4 घंटे में ही पूरी हो जाएगी, जबकि आईसीयू में भर्ती मरीजों के लिए डायलिसिस की प्रक्रिया डॉक्टर की सलाह पर निर्भर होगी। आईसीयू में भर्ती मरीजों के लिए ही सीआरआरटी मशीन से डायलिसिस की जाएगी।
सीसीएसएच में डायलिसिस के लिए उपयोग में लाये जाने वाले डायलाइजर का एकल उपयोग (सिंगल यूज) किया जाएगा, ताकि मरीज की डायलिसिस में किसी भी तरह की दिक्कत और डायलिसिस के बाद उन्हें कोई समस्या पैदा न हो। डायलाइजर के सिंगल यूज से मरीजों में संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाएगा और बेहतर तरीके से उनकी डायलिसिस पूरी हो सकेगी।
दरअसल दूसरे अस्पतालों में डायलाइजर का उपयोग एक मरीज पर दो से ज्यादा बार किया जाता है, लेकिन कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियेलिटी हॉस्पिटल में एक बार में एक ही डायलाइजर का उपयोग किया जाएगा, जिससे डायलिसिस के बाद मरीज में संक्रमण फैलने की आशंका न के बराबर हो और मरीज को बेहतर नतीजे मिल सकें।
गौरतलब है कि डायलाइजर एक चिकित्सा उपकरण होता है, जिसे आम बोलचाल में कृत्रिम गुर्दा या आर्टिफिशियल किडनी कहा जाता है। यह हेमोडायलिसिस प्रक्रिया के दौरान किडनी फेलियर के मरीजों के खून से गंदगी, विषाक्त पदार्थों और अतिरिक्त तरल पदार्थ को साफ करने वाला मुख्य फिल्टर है। यह डायलिसिस मशीन से जुड़कर काम करता है और इसमें अर्ध-पारगम्य झिल्ली (सेमी-परमिएबल मेम्ब्रेन) होती है जो रक्त को साफ करती है। जब किडनी खून को साफ करने में असमर्थ हो जाती है तो डायलाइजर खून से यूरिया, क्रिएटिनिन जैसे अपशिष्ट और अतिरिक्त पानी को हटाता है। इसके अंदर हजारों महीन खोखले रेशे (हॉलो फाइबर्स) होते हैं, जिनसे होकर खून गुजरता है और साफ होता है। इसका उपयोग क्रॉनिक किडनी रोग (सीकेडी) में खून की सफाई, Acute Renal Failure का इलाज, शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने किया जाता है।
कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियेलिटी हॉस्पिटल में स्थापित डायलिसिस यूनिट के लिए बेहद अत्याधुनिक फुली ऑटोमेटेड एडवांस ऑटोमेटिक रिवर्स ऑस्मोसिस प्लांट (आरओ) फिल्टर प्लांट भी लगाया गया है। डायलिसिस की संवेदनशील प्रक्रिया को पूरी तरह से संक्रमण मुक्त और सुरक्षित बनाये रखने के लिए 1000 लीटर का आरओ प्लांट स्थापित है, जिसमें 001 से 002 पीपीएम टीडीएस का पानी उपयोग में लाया जाएगा।
कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियेलिटी हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों के साथ ओपीडी मरीजों की डायलिसिस भी की जाएगी। डायलिसिस की प्रक्रिया केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना “आयुष्मान भारत योजना” से निःशुल्क मिलेगी। वहीं, जिनके पास आयुष्मान भारत योजना का कार्ड नहीं है, उन्हें भी बेहद रियायती दर पर यहां अत्याधुनिक तकनीक से डायलिसिस की सुविधा मिलेगी।
