अंतागढ़ थाना प्रभारी जायसवाल फिर फंसे विवादों में, पत्रकारों से दुर्व्यवहार के बाद कड़ा विरोध



कांकेर। जिले के अंतागढ़ थाना प्रभारी रमेश जायसवाल एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है, जिसके विरोध में क्षेत्र के पत्रकार थाना परिसर के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। पत्रकारों का आरोप है कि थाना प्रभारी रमेश जायसवाल ने एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए पद का रौब दिखाया और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
बताया जा रहा है कि पत्रकार एक मामले के कवरेज के लिए थाना पहुंचे थे, जहां मामूली बात को लेकर थाना प्रभारी रमेश जायसवाल भड़क गए। घटना के बाद पत्रकारों में भारी नाराजगी देखने को मिली और उन्होंने थाना प्रभारी को हटाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया। आंदोलन को स्थानीय पत्रकारों के साथ-साथ कांकेर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों का भी समर्थन मिल रहा है। इस पूरे विवाद के बीच एक दिन पहले सामने आई घटना ने भी थाना प्रभारी रमेश जायसवाल की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, अंतागढ़ में सरपंच आंदोलन के दौरान मुख्य मार्ग घंटों जाम रहा और यात्री भीषण गर्मी में परेशान होते रहे। आरोप है कि उस दौरान भी थाना प्रभारी आम लोगों और पत्रकारों की मदद करने के बजाय एक दुकान में बैठकर कूलर की हवा खाते नजर आए थे। रास्ता बंद होने पर कुछ पत्रकारों ने वैकल्पिक मार्ग और सहयोग की जानकारी मांगी, लेकिन थाना प्रभारी ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय उन्हें वापस लौटने की सलाह दे दी थी। स्थानीय लोगों और पत्रकारों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब रमेश जायसवाल के व्यवहार को लेकर सवाल उठे हों। इससे पहले भी उन पर आम लोगों और पत्रकारों से रौबदार एवं असहयोगात्मक रवैया अपनाने के आरोप लग चुके हैं। अब लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिरकार पुलिस का रवैया जनता और मीडिया के प्रति इतना कठोर क्यों होता जा रहा है। हालांकि थाना प्रभारी रमेश जायसवाल ने वर्तमान विवाद में किसी भी तरह की अभद्रता से इंकार करते हुए कहा है कि उन्होंने केवल मर्यादित तरीके से बैठने की बात कही थी। लेकिन पत्रकारों का सवाल है कि यदि व्यवहार सामान्य था तो फिर विरोध और धरने की स्थिति क्यों बनी। फिलहाल मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन चुका है तथा पत्रकारों ने स्पष्ट कर दिया है कि कार्रवाई नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

कांग्रेस नेता से हैं मधुर संबंध
कल ही प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में सरपंचों द्वारा बीच सड़क पर तंबू लगाकर दिन भर सरकार और बीजेपी नेताओं को कोसा गया था, लेकिन जब इस मामले की जानकारी लेने स्थानीय पत्रकार थाने पहुंचे तो थानेदार रमेश जायसवाल ने पत्रकारों से भी दुर्व्यवहार किया और अपनी औकात में रहने की नसीहत पत्रकारों को दे डाली। इससे स्थानीय पत्रकारों ने थानेदार के खिलाफ मोर्चा खोल उन्हें हटाने और सस्पेंड करने की मांग जिला पुलिस अधीक्षक से की है। इधर विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूर्व कांग्रेसी नेता जो विधायक भी रह चुके हैंजे वे पहले पुलिस विभाग में अधिकारी रहे हैं। सूत्र बताते हैं इस नेता के साथ टीआई जायसवाल के मधुर संबंध हैं। इसी मधुर संबंध को बनाए रखने और भाजपा सरकार को नीचा दिखाने दरोगाजी ने सरपंचों को सड़क पर कब्जा करने दिया और पत्रकारों से दुर्व्यवहार किया। इस मामले में एसडीएम श्री रजक ने भी अपना मौन समर्थन दिया। लेकिन वह भूल गए कि तपती दोपहरी में बस, कार अन्य सैकड़ों वाहनों में सवार लोग कितने परेशान हुए। अंतागढ़ के पत्रकार साथियों के साथ हुए इस दुर्व्यवहार के मामले में भानुप्रतापपुर प्रेस क्लब द्वारा समर्थन देने की बात सामने आ रही है, वहीं छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन द्वारा भी अंतागढ़ के पत्रकारों को आश्वस्त किया गया है कि अगर वे हमारे संगठन की जरूरत महसूस करेंगे, तब हम सभी साथी उनके आंदोलन में साथ रहेंगे

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