नक्सलगढ़ रहा बस्तर अब बन रहा है अफीम का गढ़
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। मिठाई और भोजनालय का धंधा करने बस्तर आए कुछ लोग नक्सलगढ़ रहे बस्तर को अब अफीमगढ़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं, मगर हमारे बस्तर की पुलिस भी मुस्तैद है। वह ऐसे मंसूबों को कभी कामयाब नहीं होने देगी। पुलिस ने 133 ग्राम से भी ज्यादा अफीम के साथ राजस्थान के एक युवक को गिरफ्तार किया है। इस अफीम की कीमत 66 हजार 500 रुपए बताई गई है।
पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के मार्गदर्शन मेें बस्तर पुलिस द्वारा नशे के सौदागरों तथा अपराधी तत्वों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी कड़ी में अवैध मादक पदार्थ अफीम बिक्री करने हेतु परिवहन करने वाले पर कार्रवाई करने में जगदलपुर कोतवाली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी कि नगर के गोयल बाड़ी तिराहा मुख्य मार्ग के पास एक व्यक्ति अफीम बेचने की फिराक में खड़ा है। सूचना पर पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के निर्देशन पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक माहेश्वर नाग के मार्गदर्शन, नगर पुलिस अधीक्षक सुमीत कुमार डी. धोत्रे के सुपरविजन में थाना प्रभारी कोतवाली लीलाधर राठौर के नेतृत्व में टीम गठित की गई। इस टीम ने बताए गए स्थान की घेराबंदी कर आरोपी जगदीश चौधरी पिता धनाराम चौधरी उम्र 29 साल पता कुम्हार पारा जगदलपुर को पकड़ा। जगदीश मूलतः राजस्थान के जोधपुर का निवासी है और यहां कुम्हारपारा में किराए का मकान लेकर रह रहा था। आरोपी जगदीश के कब्जे से मादक पदार्थ 133.3 ग्राम अफीम बरामद हुआ। इसकी कीमत 66 हजार 500 रुपए बताई गई है। जगदीश ने पुलिस को बताया कि उसने अफीम को बेचने के लिए रखा था।आरोपी के खिलाफ धारा 18 बी एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे एनडीपीएस विशेष न्यायालय जगदलपुर में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा हेतु जेल भेज दिया गया। आरोपी को पकड़ने में निरीक्षक लीलाधर राठौर, उप निरीक्षक अरुण मरकाम, प्रमोद ठाकुर, सहायक उप निरीक्षक दिलीप मंडल, प्रमोद सिन्हा, प्रधान आरक्षक विनोद चांदने, आरक्षक बलराम कश्यप, थीबरू राम बघेल, सोमलू कश्यप, तोमन बघेल, बंशी मौर्य, हरीश ने विशेष भूमिका निभाई।
अफीम को बताता रहा शिलाजीत
पकड़े जाने और अफीम बरामदगी के बाद पूछताछ में आरोपी जगदीश चौधरी पुलिस को लगातार गुमराह करता रहा। वह अफीम को शिलाजीत बताने की कोशिश में लगा रहा। आरोपी बार बार यही दोहराता रहा कि वह अपनी शारीरिक कमजोरी दूर करने के यह शिलाजीत खाता है। मगर पुलिस के सामने उसकी होशियारी ज्यादा देर तक नहीं चल पाई। पुलिस ने तथाकथित शिलाजीत की जांच के लिए एफएसएल किट की मदद ली, तो भेद खुल गया। एफएसएल जांच में उक्त पदार्थ के अफीम होने की पुष्टि हो गई।
तरह तरह का नशा
गौरतलब है कि बस्तर में नशे के लिए शराब, सल्फी के साथ ही गांजा, नशीली दवाओं और अफीम का भी अब बड़े पैमाने पर उपयोग होने लगा है। यहां पड़ोसी राज्य उड़ीसा से शराब और गांजा के साथ ही नशीली गोलियां और कैप्सूल्स की खेप भी पहुंचने लगी है। कुछ दिनों पहले ही बस्तर जिला पुलिस ने नशीली दवाएं बेचने वाले दो लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के बयान के आधार पर उड़ीसा के एक दवा व्यवसायी के बेटे को भी हिरासत में लिया गया था। दवा व्यवसायी का बेटा ही आरोपियों को नशीली गोलियां और कैप्सूल्स उपलब्ध कराता था। अब तो यहां राजस्थान से अफीम की भी खेप पहुंचने लगी है। दरअसल राजस्थान और पंजाब में बड़े पैमाने पर अफीम का सेवन किया जाता है। इन गतिविधियों को देखते हुए लगता है कि कभी नक्सलगढ़ रहा बस्तर अब सूखे नशे का गढ़ बनता जा रहा है।
