होटल स्टील सिटी के लिफ्ट में खराबी, जिला उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला
बालोद। व्यवसायिक प्रतिद्वंदिता के बीच भी व्यवसायी एक दूसरे को सहयोग करते हैं, किंतु पूरी रकम अदा करने के बाद भी जब ग्राहक की आंख में धूल झोंकने का प्रयास किया जाता है तब पीड़ित को उपभोक्ता को न्यायालय की शरण लेनी पड़ती है। ऐसे ही एक मामले में जिला उपभोक्ता फोरम ने ऐसा शानदार फैसला दिया है, जिसकी चर्चा पूरे जिले के व्यवसायियों के बीच हो रही है। इस सारे मामले में अधिवक्ता दीपक समेटकर ने परिवादी की ओर से मजबूती से अपना पक्ष रखा, जिससे सहमत होकर फोरम ने उक्त फैसला दिया।
बालोद जिला उपभोक्ता फोरम में प्रार्थी होटल स्टील सिटी दल्ली राजहरा के संचालक प्रवीण कुमार जैन द्वारा सावी एलीवेटर के संचालक पूरन साहू के विरूद्ध परिवाद दायर किया गया था। परिवाद में बताया गया कि सावी एलीवेटर के मालिक ने होटल स्टील सिटी में अच्छी लिफ्ट लगवाने का भरोसा दिलाकर दो लिफ्ट लगाने 7 लाख रुपए का भुगतान प्राप्त किया था। इसके बाद भी होटल में मात्र एक लिफ्ट लगाया गया, दूसरा लिफ्ट नहीं लगाया गया। दो साल की वारंटी एवं खराबी आने पर निःशुल्क मरम्मत एवं सर्विस देने की बात पूरन साहू ने कही थी, मगर सर्विस नहीं दी। एक लिफ्ट लगाकर लाख 13 हजार रुपए का बिल दिया गया था, दूसरा लिफ्ट नहीं लगाया। दिसंबर 2024 में अन्य व्यक्ति से संपर्क कर दूसरी कंपनी का लिफ्ट लगाया गया । सावी एलीवेटर द्वारा लगाए गए लिफ्ट में निरंतर खराबी आने लगी जिसे सुधारा नहीं गया। प्रार्थी द्वारा परेशान होकर थाने में लिखित शिकायत की, पूरन साहू को वकील के जरिए रजिस्टर्ड नोटिस भी भेजा। पूरन साहू ने न दूसरा लिफ्ट लगाया, न एक लिफ्ट की रकम वापस की और न ही नोटिस का कोई जवाब दिया। परिवादी प्रवीण जैन द्वारा भुगतान किए गए 7 लाख रू. में से एक लिफ्ट की रकम समायोजित कर शेष रकम दिलाए जाने एवं खराब लिफ्ट में सुधार किए जाने, दूसरा लिफ्ट लगाने, अन्य मैकेनिकों से कराई गई मरम्मत में हुई आर्थिक क्षति मय ब्याज दिलाने एवं अन्य अनुतोष हेतु परिवाद प्रस्तुत किया गया था। लिफ्ट लगवाने हेतु लिखित अनुबंध नहीं किया गया था, जॉब वर्क के अनुसार कार्य किया गया है। लिफ्ट के संबंध में हैंडओवर सर्टिफिकेट 24 माह की वारंटी दी गई थी, जिसमें फ्री सर्विस का उल्लेख है।उपभोक्ता से सेवा प्रदाता अगर राशि प्राप्त करने के उपरांत केवल लिखित इकरार निष्पादित किए जाने पर ही गारंटी वारंटी देगा, तो यह उपभोक्ता से अनुचित व्यवहार की श्रेणी में आता है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बालोद का यह निष्कर्ष रहा कि विरोधी पक्षकार ने सेवा में कमी की है। परिवाद आंशिक रूप से स्वीकार किया गया। विरोधी पक्षकार को आयोग में निर्देशित किया है कि वह 45 दिवस की अवधि मे परिवादी को 4 लाख 72 हजार रू, 20 हजार रुपए मानसिक क्षति के रूप में एवं 5 हजार रू. वाद व्यय अदा करें। इसके अलावा परिवाद प्रस्तुति दिनांक से 6 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी अदा करने का निर्देश विरोधी पक्षकार को दिया गया है।
