विश्व आदिवासी दिवस पर भाजपा का असली चेहरा बेनकाब, भाजपा आदिवासियों का सम्मान नहीं करती – विक्रम मंडावी
बीजापुर :- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार आज जिला मुख्यालय बीजापुर में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विधायक विक्रम मंडावी ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस प्रदेश में 32 प्रतिशत आदिवासी आबादी है, वहां विश्व आदिवासी दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित किसी भी भाजपा नेता ने एक भी बधाई संदेश जारी नहीं किया। यह साफ दर्शाता है कि भाजपा आदिवासियों को सिर्फ वोट बैंक मानती है, उनका सम्मान नहीं करती।
विधायक विक्रम मंडावी ने कहा,
“9 अगस्त को पूरी दुनिया ने विश्व आदिवासी दिवस मनाया, लेकिन छत्तीसगढ़ के आदिवासी मुख्यमंत्री अपने ही समाज के उत्सव से दूर रहे। आरएसएस के दबाव में भाजपा आदिवासी अस्मिता का खुला विरोध कर रही है। 2023 से पहले ये लोग बधाई देते थे, अब चुप्पी साध ली है। ये साबित करता है कि आरएसएस आदिवासियों को ‘वनवासी’ बनाकर उनकी स्वतंत्र संस्कृति मिटाना चाहती है।”
प्रेस वार्ता में विधायक विक्रम ने आगे कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं है। यह हमें अपनी जड़ों को याद करने का दिन है। यह दिन उन महान परंपराओं को नमन करने का दिन है, जिन्होंने सदियों से जल, जंगल, जमीन, प्रकृति और मानवता के बीच संतुलन बनाकर रखा है। हमारे आदिवासी समाज ने हमें सिखाया है कि जंगल केवल लकड़ी नहीं है, नदी केवल पानी नहीं है और जमीन केवल संपत्ति नहीं है। जंगल हमारा जीवन है, जल हमारी सांस है, जमीन हमारी पहचान है, और हमारी संस्कृति हमारी आत्मा है। छत्तीसगढ़ की पहचान आदिवासी संस्कृति के बिना अधूरी है। बस्तर की धरती हो, सरगुजा की पहाड़ियां हों, कांकेर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कोरबा, जशपुर, बलरामपुर और गरियाबंद के वनांचल हों हर जगह आदिवासी समाज ने अपनी मेहनत, संस्कृति और संघर्ष से छत्तीसगढ़ की पहचान बनाई है।
भाजपा सरकार ने इस महत्वपूर्ण दिवस को शासकीय स्तर पर मनाने से परहेज करके पूरे आदिवासी समाज का अपमान किया है। जिस प्रदेश की पहचान इन्हीं वनांचलों से बनी है, वहां की सरकार आदिवासी दिवस मनाने से भाग रही है। ये आदिवासियों के साथ सीधा धोखा है।
विधायक मंडावी ने आरोप लगाया कि भाजपा आदिवासियों को सिर्फ वोट के लिए इस्तेमाल करती है। एक आदिवासी को मुख्यमंत्री बनाकर दिखावा तो कर दिया, लेकिन उन्हें अपने भाई-बहनों के साथ उत्सव मनाने तक की इजाजत नहीं दी।
उन्होंने कहा “भाजपा और आरएसएस भले ही आदिवासी दिवस का विरोध करें, लेकिन छत्तीसगढ़ का आदिवासी समाज इसे गर्व से मनाता रहा है और मनाता रहेगा। जल-जंगल-जमीन के अधिकारों से कोई समझौता नहीं होगा। आदिवासी अस्मिता से कोई समझौता नहीं होगा।”
प्रेस वार्ता में विधायक विक्रम मंडावी ने भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर और अनगिनत आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि ये वीर हमें सिखा गए हैं कि अन्याय के सामने झुकना नहीं है। अधिकारों के लिए संघर्ष करना लोकतांत्रिक अधिकार है, अपराध नहीं। विधायक विक्रम मंडावी ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी भाजपा के इस खुले विरोध को कभी नहीं भूलेंगे और कभी माफ नहीं करेंगे। प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शंकर कुडियम, वेणु गोपाल राजू, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती नीना रावतीय उद्दे, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कमलेश कारम, इंटक के अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, जुग्गी झोपडी प्रकोष्ट के अध्यक्ष नेहरू बघेल, शहर अध्यक्ष बबलू खत्री, महामंत्री पुरुषोत्तम सल्लूर और जगदीश सेन सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद थे।
