ग्रामीणों का दिल और भरोसा जीत लिया सुकमा पुलिस ने



सुकमा। नक्सल मुक्त बस्तर में अब पुलिस का मानवीय चेहरा सामने आ रहा है। दशकों तक नक्सलियों के झांसे में रह कर दर्द झेलते आए सुकमा जिले के सुदूर गांवों के ग्रामीणों का भरोसा जीतने का काम सुकमा जिला पुलिस कर रही है। भारी बरसात के बीच खुद सुकमा एसपी मयंक गुर्जर ग्रामीणों के बीच पहुंच कर उनका दर्द साझा करते हुए उनकी समस्याओं का निराकरण कर रहे हैं। एसपी मयंक गुर्जर के नेतृत्व में सुकमा पुलिस ने “नियद दुआड़ ते” यानि पुलिस तुम्हारे द्वार पर कार्यक्रम चला रही है। इस कार्यक्रम का सकारात्मक असर भी देखने को मिल रहा है। ग्रामीण काफी उत्साहित हैं और खुलकर पुलिस अधिकारियों से बातें कर रहे हैं और उन्हें अपना दुखड़ा भी सुना रहे हैं।
बता दें कि सुकमा जिला बस्तर संभाग में सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिला रहा है। इस जिले को नक्सलियों का गढ़ माना जाता रहा है। सबसे ज्यादा उत्पात नक्सलियों ने इसी जिले में मचाया था। सैकड़ों पुलिस जवानों और अधिकारियों तथा अन्य सुरक्षा बलों के जवानों की शहादत की बदौलत यह जिला नक्सल मुक्त हो पाया है। सुकमा के सुदूर इलाकों के ग्रामीण पहले पुलिस से दूर भागते थे, पुलिस वालों से बात करने से गुरेज करते थे। वजह थी सिर्फ नक्सलियों का खौफ। नक्सली भले ही अब नहीं रह गए हैं, मगर यह खौफ लोगों के दिलों में अब भी समाया हुआ है। इसी खौफ से ग्रामीणों को बाहर निकालने के लिए सुकमा पुलिस जनता से संवाद कार्यक्रम चलाकर लोगों को रोजगार संबंधी जानकारी की जानकारी दे रही है और बच्चों व युवाओं की प्रगति में सहायता कर रही है।सुकमा पुलिस द्वारा पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर (आईपीएस) के निर्देशन एवं वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में जिले के अंदरूनी एवं दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की पहुंच सुनिश्चित करने तथा आमजन से बेहतर संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से “नियद दुआड़ ते” (पुलिस तुम्हारे द्वार पर) अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में थाना पोलमपल्ली क्षेत्रांतर्गत ग्राम गोंदपल्ली में पुलिस टीम बारिश के बीच पहुंची और ग्रामीणों के साथ संवाद कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली। दोरनापाल डिवीजन के डीएसपी मनीष रात्रे ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं तथा गांव की मूलभूत जरूरतों के बारे में चर्चा की। ग्रामीणों ने पुल-पुलिया सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित मांगें एवं समस्याएं पुलिस अधिकारियों के समक्ष रखी। पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर ने ग्रामीणों को उनकी सुरक्षा के प्रति आश्वस्त करते हुए हरसंभव सहयोग एवं सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों से आपसी सहयोग एवं संवाद बनाए रखने की अपील की।

साइबर क्राइम से किया अलर्ट
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को साइबर ठगी, फर्जी कॉल, ऑनलाइन फ्रॉड एवं संदिग्ध लिंक से होने वाले साइबर अपराधों के संबंध में जानकारी दी गई। ग्रामीणों को समझाइश दी गई कि ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंक खाता संबंधी गोपनीय जानकारी एवं पासवर्ड किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें तथा किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें। ग्रामीणों को साइबर सुरक्षा की शपथ भी दिलाई गई।

बांटी स्टेशनरी और साड़ियां
सिविक एक्शन कार्यक्रम के अंतर्गत पुलिस द्वारा ग्रामीणों के साथ आत्मीय संवाद स्थापित करते हुए युवाओं को खेल सामग्री, बच्चों को कॉपी, पेन, बैग एवं पेंसिल तथा महिलाओं को साड़ी एवं चप्पल वितरित की गई। ग्रामीणों के बीच मिठाई का भी वितरण किया गया। पुलिस की इस पहल से ग्रामीणों में उत्साह एवं खुशी का माहौल देखने को मिला। सुकमा पुलिस का संदेश है कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास एवं संवाद ही मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की आधारशिला है। सुकमा पुलिस जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों तक पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने, सुरक्षा का भरोसा देने और हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए सदैव तत्पर है।
वीराभट्टी में दी दस्तक
सुकमा पुलिस द्वारा पुलिस अधीक्षक मयंक गुर्जर (आईपीएस) के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री रोहित शाह (आईपीएस) एवं मनोज तिर्की के मार्गदर्शन में जिले के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में साइबर जागृति अभियान चलाकर आमजन को साइबर अपराध एवं ऑनलाइन ठगी से बचाव के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है। इसी क्रम में 26 अगस्त को ग्राम वीराभट्टी में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 50 ग्रामीणों ने सहभागिता की। पुलिस टीम द्वारा ग्रामीणों को साइबर ठगी एवं ऑनलाइन फ्रॉड के विभिन्न तरीकों की जानकारी देते हुए बचाव के उपाय बताए गए।ग्रामीणों को बताया गया कि साइबर ठग कई बार स्वयं को पुलिस अधिकारी, बैंक प्रबंधक अथवा अन्य अधिकारी बताकर फोन करते हैं और गोपनीय जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। ऐसे किसी भी फोन कॉल पर विश्वास न करें और अपनी बैंकिंग संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। इसके साथ ही ग्रामीणों को अनजान एवं संदिग्ध ऑनलाइन लिंक पर क्लिक नहीं करने तथा ऐसे लिंक के माध्यम से अपनी व्यक्तिगत अथवा बैंक संबंधी जानकारी अपलोड नहीं करने की समझाइश दी गई।

गोलापल्ली के बाजार में अभियान
ग्राम गोलापल्ली के साप्ताहिक बाजार में आसपास के ग्रामीणों को साइबर अपराध एवं ऑनलाइन ठगी से बचाव के संबंध में जागरूक किया गया। पुलिस टीम द्वारा ग्रामीणों को डिजीटल लेनदेन के दौरान सावधानी बरतने, अनजान नंबरों से आने वाले कॉल एवं संदेशों से सतर्क रहने तथा किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करने की समझाइश दी गई। ग्रामीणों से अपील की गई कि साइबर अपराध से बचने के लिए स्वयं जागरूक रहें तथा अपने परिवार एवं आसपास के लोगों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।

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