कबीरधाम “ग्राम नगर जंगलम कवर्धा मंगलम” : स्वामिश्री ने 08 गांवों में फहराया हिंदुत्व का प्रतीक भगवा, ग्रामीणों ने कहा जय जय श्रीराम,

कवर्धा :- दंडी स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के द्वारा ‘ग्राम नगर जंगलम कवर्धा मंगलम’ की शुरुआत हो गई हैं। स्वामी जी तय कार्यक्रम के अनुसार कबीरधाम जिले के गांव गांव में भगवाध्वज लगाने निकल चुके हैं। स्वामी श्री बोड़ला ब्लॉक के अंतिम छोर गांव बाकी पहुंचे चुके हैं।

गांव गांव में भगवा लहराने का लिया था संकल्प –

बता दे कि कवर्धा में 3 अक्टूबर को हुए भगवा ध्वज अपमान के बाद स्वामी जी ने संकल्प लिया था। कवर्धा क्षेत्र के गांव-गांव जाकर भगवा ध्वज लगाएंगे और हिंदुत्व को जगाएंगे। स्वामी जी ने संकल्प को पूरा करते हुए 10 दिसंबर 2021 को विशाल हिन्दू जन समूह के साथ कचहरी पारा राम मंदिर से पद यात्रा करते हुए धर्मध्वज श्री परशुराम चौक पहुंच कर 108 फिट स्तम्भ पर भगवा विशाल धर्म ध्वज फहराया। स्वामी जी ने उस दिन कवर्धा का नाम धर्मध्वज राजधानी किया। वहीं, उन्होंने आह्वान किया हम जल्द आएंगे और कवर्धा के हर गांव में भगवा ध्वज लगाएंगे।

बोड़ला ब्लॉक के अंतिम गांव बाकी पहुंचे स्वामी श्री –

अब आखिरकार वह समय आ गया, जब स्वामी जी कबीरधाम के गांव-गांव जाकर भगवा ध्वज लगा रहे हैं व सभी को बता रहे हैं कि ‘हिंदू स्वाभिमान सर्वोपरि’ है। अपने तय कार्यक्रम के अनुसार स्वामी जी आज कवर्धा जिला के बोड़ला ब्लॉक के अंतिम गांव बाकी पहुंचे और जनसमूह को संबोधित किया। जनसमूह द्वारा स्वामी जी का भव्य स्वागत किया गया। स्वामी जी के साथ इस समय श्री शंकराचार्य जन कल्याण न्यास के प्रमुख ट्रस्टी चंद्र प्रकाश उपाध्याय, पूर्व विधायक मोतीराम चंद्रवंशी गणेश तिवारी, ब्रमचारी जोतिर्मयानंद, ब्रम्हचारी, केशवानन्द, पंडित आनंद उपाध्याय, धर्मवीर दुर्गेश देवांगन सहित प्रत्येक गांव के सैकड़ो सनातनी उपस्थित रहे है।

8 गांव में धर्मध्वज रोहण और कर सभा को किया संबोधित

स्वामी जी ने जन समूह को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी प्रतिष्ठा का कोई अपमान करता है, तो सहन नहीं होता है। हम भारतवासी सम्मान के साथ और प्रतिष्ठा के साथ अपना जीवन व्यतीत करना चाहते।

बता दे कि इस गांव में दो राज्यो का समावेश है। मध्यप्रदेश का डिंडोरी जिला और छत्तीसगढ़ का कबीरधाम जिला। अब तक यहां 8 गांव में धर्मध्वज रोहण व धर्मसभा हो चुका हैं, जिसमें बाकी, केशमर्दा, चेमरादादर, पिपरखुटा, मुकाम, भुरसिपकरी, सुकझर, दलदली शामिल है। स्वामी श्री शाम 05 बजे वापस भोरमदेव पहुंच रात्रि विश्राम करेंगे।

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